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धनतेरस पर होगी धन की वर्षा

Posted On: 3 Nov, 2010 Others में

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मंहगाई आसमान छू रही है और जेबों के खाली होने का समय आ चुका है पर भारतीयों की आस्था का असर ही है जो इस मंहगाई के दौर में भी हम हर त्यौहार को पूरी आस्था और धूमधाम से मनाते हैं. दिवाली दो दिन बाद है और दिवाली से जुड़े पांच त्यौहार में से पहला धनतेरस आज है. आज की युवापीढ़ी और बदलती जीवन शैली में भी धनतेरस की परम्परा कायम है. समाज के सभी वर्गों के लोग कई महत्वपूर्ण चीजों की खरीदारी के लिए पूरे साल इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस दिन चांदी का सामान या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है.


dhanterasहर साल कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी के दिन धनवंतरि त्रयोदशी मनायी जाती है. जिसे आम बोलचाल में ‘धनतेरस’ कहा जाता है. समुद्र मंथन में आज के समय ही धनवंतरि प्रकट हुए थे  और आज के दिन को ही आयुर्वेद के देवता धनवंतरि के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.


परंपरा और आस्था में डुबा त्यौहार

धनतेरस के दिन नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परम्परा है. सोना सौंदर्य में वृद्धि तो करता ही है, मुश्किल घड़ी में संचित धन के रूप में भी काम आता है. कुछ लोग शगुन के रूप में सोने या चांदी के सिक्के भी खरीदते हैं. इस पर्व पर बर्तन खरीदने की शुरआत कब और कैसे हुई, इसका कोई निश्चित प्रमाण तो नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि हाथ में कलश लेकर प्रकट हुए धनवंतरि के उसी कलश की वजह से ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है. कहीं कहीं लोकप्रथा के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है.


3144635_dhan_teras_diwali2धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है. ऐसी मान्यता है कि  चांदी चन्द्रमा का प्रतीक है और चन्द्रमा शीतलता प्रदान करता है जिससे मन में संतोष रूपी धन का वास होता है. संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है. जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है, सुखी है और वही सबसे धनवान है. भगवान धनवंतरि जो आयुर्वेद चिकित्सा के देवता भी हैं उनका कहना था कि संतोष से बड़ी कोई दूसरी दवा है ही नहीं. लोग इस दिन ही दिवाली की रात में लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं.


धन संपत्ति की प्राप्ति हेतु कुबेर देवता के लिए घर के पूजा स्थल पर दीप दान करें एवं मृत्यु

देवता यमराज के लिए मुख्य द्वार पर भी दीप दान करना शुभ माना जाता है.


आज धनतेरस के शुभ पर्व पर धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त करने के लिए शुभ मुहूर्त में कार्य करना चाहिए. आज धनतेरस का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:


शाम- 04:30 से 7:30 बजे तक (अचल संपत्ति)

शाम- 06:23 से 08 :21 बजे तक (चल संपत्ति)

रात्री- 09:00 से 10: 30 बजे तक (बर्तन आदि के लिए)


आज आप भी अपने घर में आवश्यकता अनुसार बर्तन या चांदी आदि के सामान खरीद धनवंतरि की पूजा करें ताकि पूरे साल धन और शारीरिक सुख की आपको प्राप्ति होती रहे.

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atharvavedamanoj के द्वारा
November 4, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||…………………………….मनोज कुमार सिंह ”मयंक” आदरणीय संपादक जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम


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