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आतंकवाद का रंग

Posted On: 13 Sep, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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देश में आजकल एक नया तूफान आतंकवाद के रंग को लेकर छिड़ चुका है. नेतागण आतंकवाद के विभिन्न रंगों को सामने लाने की कोशिश में हैं. कोई भगवा रंग बता रहा है आतंकवाद का तो कोई पूछ रहा है कि कश्मीर घाटी के आतंकवाद का रंग क्या है.


स्थिति जटिल है, हालात संवेदी हैं, मामला संगीन है. आतंकवाद को अलग-अलग व्याख्यायित करने का मोह खतरनाक है. हालांकि देश की जनता निश्चित रूप से सब कुछ समझती है फिर भी जनमत को अपनी ओर खींचने के लिए इस तरह का प्रयास निंदनीय और घृणास्पद है.


वोट के लिए आतंकवाद के रंगों की राजनीति कितनी खतरनाक हो सकती है ये भी इन्हें बखूबी मालूम है फिर भी ये अपना लालच दबा नहीं सकते और देश को खतरनाक राह पे ले जाने की कोशिश करते रहेंगे.


पहले गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि “भगवा आतंकवाद” के रूप में एक नई चीज सामने आई है. चिदंबरम के अनुसार देश में कई धमाकों के पीछे भगवा आतंकवाद का हाथ रहा है. अब उनसे पूछा जाना चाहिए कि भगवा शब्द को इस्तेमाल करने के पीछे उनकी मंशा क्या रही है. इसी के अगले घटनाक्रम में “भगवा आतंकवाद” पर पी. चिदंबरम को आड़े हाथों लेते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कश्मीर घाटी में आतंकवाद का क्या रंग है यह भी बता दें.


यानी रंगों की राजनीति शुरू हो चुकी है. गृहमंत्री का बयान किसी अबोध शिशु की भांति नजर आता है जिसे ये पता ही नहीं हो कि उसके ऐसे वक्तव्यों का क्या परिणाम हो सकता है. जिसने बस किसी भोलेपन से भगवा नाम ले लिया और भगवा शब्द जिसके लिए केवल जिज्ञासा का प्रश्न हो.


राष्ट्र के शीर्ष पदों पे आसीन राजनेताओं द्वारा इस तरह का अनर्गल बयान केवल प्रलाप कहा जा सकता है. आतंकवाद को रंग की कैटगरी में बांट कर देखना तो निहायत ही दुखद है. एक क्रूर हिंसात्मक मानवद्रोही कृत्य को परिभाषित करने और उससे लड़ने की बजाय मजे से उसे रंगों की राजनीति का स्वरूप देकर किसी खास धर्म या विचारधारा को चोट पहुंचाना कहॉ तक अक्लमन्दी है. क्या हम ऐसे ही राजनेताओं की अपेक्षा करते हैं जो देश की सुरक्षा तो ना कर सकें बल्कि उसे भीतर से और खोखला बनाने का प्रयास करें.


क्या किसी आतंकवादी का भी कोई धर्म विशेष होता है या कि आतंकवाद रंग के अनुसार अपना चोला बदल सकता है. उत्तर सीधा है कि किसी आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता इसलिए उसका कोई मानवाधिकार भी नहीं हो सकता क्योंकि वो इंसान नहीं होता साथ ही आतंकवाद का केवल एक रंग है वह है क्रूर हिंसात्मक मानवद्रोही रंग.

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आर.एन. शाही के द्वारा
September 13, 2010

‘क्या किसी आतंकवादी का भी कोई धर्म विशेष होता है या कि आतंकवाद रंग के अनुसार अपना चोला बदल सकता है. उत्तर सीधा है कि किसी आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता इसलिए उसका कोई मानवाधिकार भी नहीं हो सकता क्योंकि वो इंसान नहीं होता साथ ही आतंकवाद का केवल एक रंग है वह है क्रूर हिंसात्मक मानद्रोही रंग.’ — यह बेबाक़ परिभाषा ही सही है, बाक़ी सब अपने-अपने मतलब से बनाए जा रहे रंग ही हैं, जिनकी कलई बिना किसी साबुन के समयानुसार स्वत: धुल जाती है । अफ़सोस ये है कि मतलबी राजनीति तो अपना सामयिक स्वार्थ सिद्ध कर ही लेती है । ये बात अलग है कि आगे चलकर उनकी परिभाषाएं उन्हीं के गले की फ़ांस भी बनती आई हैं । ओसामा बिन लादेन और भिंडरांवाले का उदाहरण सर्वविदित है । अच्छे विचारोत्तेजक सम्पादकीय लेख के लिये साधुवाद ।

    डा.. एस शंकर सिंह के द्वारा
    September 13, 2010

    प्रिय साही जी, नमस्कार मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. मुझे यह देखकर अपार दुःख होता है कि हमारे देश में आतंकवादियों के हिमायती ज्यादा हैं, उनके द्वारा मारे और सताए गए मासूम लोगों और सुरक्षाकर्मियों के कोई नहीं. एकदिन तो हद हो गई जब टी वी के किसी चैनल पर एक discussion के दौरान मानवाधिकारवादी गौतम नौलखा नें एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वे आतंकवादियों के शिकार सुरक्षाकर्मियों और मासूमों को इंसान नहीं मानते. न तो इन मारे गए लोगों के कोई मानवाधिकार होते हैं. इन मानसिक तौर से विक्षिप्त लोगों के बारे में क्या कहा जाय. ऐसे अनेक से \’ स्वयंभुव \’ मानवाधिकारवादी बरसाती मेढक की की तरह प्रकट हो गए हैं. इनकी सहानुभूति आतंकवादियों के साथ है. इनके विरुद्ध क्यों न एक सामाजिक आन्दोलन चलाया जाना चाहिए. क्यों न इनका सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए. अरुंधती राय, मेधा पाटकर, स्वामी अग्निवेश और कई एनी नित्यप्रति माओवादी आतंकवादियों के पक्ष में ऊल जलूल बयान देते रहते हैं. .ये लोग अपने क्रिया कलापों से सुरक्षाकर्मियों को हतोत्साहित और आतंकवादियों का मनोबल बढाते रहते हैं. इसका क्या समाधान होना चाहिए. यह आतंकवादियों से बड़ा खतरा है..

    डा.. एस शंकर सिंह के द्वारा
    September 13, 2010

    पुनश्च, अरुंधती राय तो माओवादी आतंकी हत्यारों को \’ बन्दूक के साथ गाँधी \’का खिताब देती है.इस प्रकार उन्होंने आतंकवादियों को महिमामंडित कर दिया और गाँधी जी का भी अपमान कर दिया..

    SS के द्वारा
    September 14, 2010

    Aantak vaad Ka Rahota Hota Hai Rajniti or Leader Aaj Punjab Main LagBhag Har Car or Moter Cycle Par Likha Hai Mud Aana Pau( Phir Aana Padega) Bhindra Wala Kya Yah Sahi Hai Hai Aantakvaad Ko Badhana Nahin Hai He Police Station Main Sirf Akali Worker Ki hI Suni Jaati Hai Hindu Ki Nahin Punjab Main Har Profit Wala Dhanda Chif Minister Ke Kabje Main Hai or Bahut Se Danik Jagran Ke Patrkar Bhi Inke Saath Hai Hai Kya Yah Theek Hai

    sanjiv के द्वारा
    September 14, 2010

    श्री मान जी, आप की बात बिलकुल ठीक है की आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता, परन्तु हम क्यों नहीं आतंकवाद को रंग देने वाले इन सियासी लोगो के खिलाफ एक जुट होते, क्यों हमारी सरकार चुप है कश्मीर और नक्सलवाद जैसे भयानक मुद्दे पर, और क्यों बार-२ वोह गुजरात में नरेंदर मोदी जैसे विकास पुरुष जिन्होंने अपने राज्य में विकास और शांति की मिसाल कायम की है उनपर आरोप लगते हैं क्या सरकार को उनसे सलाह नहीं लेनी चाहिए, अगर पनजब में सही और सख्त रुख न अपना होता तो पनजब भी आज आतंकवाद के साये में होता और केवल पुनजब ही नहीं हरियाणा और दिल्ली भी इससे अछूते नहीं रह पाते


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