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..और ऑटोग्राफ से भर दिया पूरा पन्ना

Posted On: 4 Aug, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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लोग अपने पसंदीदा कलाकार के एक ऑटोग्राफ के लिए तरसते हैं लेकिन किशोर कुमार ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने एक प्रशंसक को एक ही पन्ने पर कई ऑटोग्राफ दे दिए थे। किशोर कुमार के प्रशंसक हरिकिशन गिन्नौरे बताते हैं, हम लोग अप्रैल 1979 में एक कैंप के सिलसिले में ऊटी गए थे। पता चला कि किशोर कुमार भी वहां आए हैं। वह जिस होटल में ठहरे थे, हम वहां पहुंच गए। किशोर कहीं गए थे। वह होटल आए, हमें देखा और अपने कमरे में चले गए। उनके साथ कुछ लोग और थे। उन्होंने बताया हमलोग लौटने ही वाले थे कि हमने किशोर को आते देखा। हमलोग रुक गए। उन्होंने हमें देखा और हाथ हिलाते हुए आगे बढ़े कि हम लोग दौड़कर उनके पास पहुंच गए। तब ऑटोग्राफ बुक का चलन नहीं था। हम सबने अपनी-अपनी जेब टटोली और कागज निकालकर उनके आगे कर दिए। उन्होंने सबके कागजों पर ऑटोग्राफ दिए। मेरा कागज बहुत मुड़ातुड़ा हुआ था। सबसे आखिर में मुझे ही ऑटोग्राफ मिला।


गिन्नौरे के अनुसार मैंने खराब कागज की वजह से झेंपते हुए उनसे कहा कि हमें उनके यहां होने की जानकारी नहीं थी वरना अच्छा कागज लाते। इतना कहकर मैं जाने लगा। उसी समय किशोर कुमार की आवाज आई सुनो। मैं मुड़ा, उन्होंने हाथ के इशारे से मुझे बुलाया और ऑटोग्राफ वाला कागज मांगा। मैंने दे दिया। उन्होंने पूरे पन्ने में कई ऑटोग्राफ दे दिए। आज भी मैंने उस कागज को संभालकर रखा है।


मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में चार अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। गाने की नई-नई शैलियों की शुरूआत करने वाले किशोर ने गायन का सफर कोरस गायक के तौर पर शुरू किया था। 1948 में बनी फिल्म जिद्दी से उनके सोलो गायन की शुरुआत हुई। संगीत की विधिवत शिक्षा लिए बिना इस गायक ने हिन्दी के अलावा बांग्ला, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उडि़या भाषा में भी गीत गाए।


वर्ष 1951 में आंदोलन फिल्म से अभिनय की शुरूआत कर किशोर कुमार ने न केवल दूसरों की फिल्मों में अभिनय किया बल्कि खुद भी फिल्में बनाईं। अभिनेता के तौर पर उनकी अंतिम फिल्म थी दूर वादियों में कहीं।


फिल्म डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथनी, दोस्ताना जैसी कई फिल्मों में आज के महानायक अमिताभ बच्चन के लिए गा चुके किशोर कुमार 1980 के दशक के मध्य में एक बार उनसे इसलिए नाराज हो गए थे क्योंकि अमिताभ ने किशोर की एक होम प्रोडक्शन फिल्म में अतिथि कलाकार की भूमिका नहीं की थी। किशोर ने बिग बी के लिए गाना बंद कर दिया था। बाद में सुलह हो गई।


किशोर की पत्नी योगिता बाली ने जब उनसे तलाक लेकर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से विवाह किया तो किशोर मिथुन से रूठ गए। लेकिन फिर दोनों में सुलह हो गई।


गायक, अभिनेता, गीतकार, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक किशोर कुमार ने 13 अक्तूबर 1987 को अंतिम सांस ली। मौत के पहले उन्होंने अंतिम गीत फिल्म वक्त की आवाज (1988) के लिए गाया जो मिथुन पर फिल्माया गया था।


बहुरंगी थे बाबा

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anjali के द्वारा
August 4, 2010

बिलकुल सही कहा किशोर दा अपनी आवाज की वजह से आने वाले समय तक लोगों के दिल में अरज करते रहेंगे.


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