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हिंदू आतंकवाद का हौवा

Posted On: 21 Jul, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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मालेगाव बम धमाके के सिलसिले में पकड़े गए कथित हिंदू आतंकवादियों-साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित के खिलाफ सबूतों का अभाव और लश्करे-तैयबा के आतंकवादी डेविड हेडली के खुलासों से सेकुलर राजनीति की वीभत्सता सत्यापित होती है। यह घटनाक्रम इस कटु सत्य को भी रेखाकित करता है कि राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति के आगे गौण है। मालेगाव बम धमाके में हिंदू संगठन का नाम आने के बाद से ‘हिंदू आतंकवाद’ की संज्ञा उछली। हिंदू और हिंदुत्व से दुराग्रह रखने वाले मीडिया के एक वर्ग में इस नई ‘संज्ञा’ में रोजाना नए ‘विशेषण’ जोड़ने की होड़ सी लग गई। इसी कड़ी में हाल ही में एक मीडिया समूह ने यह खुलासा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध हिंदूवादी संगठन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की हत्या करने की साजिश रच रहे हैं।


15 जून, 2004 को गुजरात पुलिस ने केंद्रीय खुफिया एजेंसी की सूचना के आधार पर लश्करे-तैयबा के चार आतंकियों को मार गिराया था, जिसमें वह इशरत जहा भी शामिल थी जिसे सेकुलरिस्टों का कुनबा तब निर्दोष और भोलीभाली लड़की साबित करने पर अड़ा था। पिछले दिनों हेडली ने इसकी पुष्टि कर दी कि इशरत लश्कर की आतंकवादी थी। तब मीडिया के एक खंड ने उक्त घटना को पाठकों तक इस तरह प्रेषित किया था, जैसे गुजरात की ‘हिंदूवादी सरकार’ ने निरपराध अल्पसंख्यकों को मार गिराया है। 26/11 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के दौरान मालेगाव बम धमाके में हिंदू संगठन का हाथ ढूंढने वाले महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे शहीद हुए थे। तब भी उनकी मौत के लिए हिंदूवादी संगठनों को कसूरवार ठहराने की कोशिश की गई थी। एक पुस्तक लिखी गई-’हू किल्ड करकरे’ और मीडिया में उसकी खूब चर्चा हुई, मानो पुस्तक का एक-एक शब्द ब्रह्मवाक्य हो।


प्रशासन तंत्र में हिंदूवादी व्यवस्था के हावी होने की चर्चा करते हुए पुस्तक में लिखा है, ‘यदि आईबी ने पहले ही हिंदू आतंक का खुलासा कर दिया होता तो ऐसे कई बम धमाके रोके जा सकते थे..उनकी योजना श्रृंखलाबद्ध बम धमाके कर आईबी में मौजूद अपने शुभचिंतकों के माध्यम से उसका ठीकरा मुस्लिम समुदाय पर फोड़ना थी।’ आश्चर्य की बात है कि भारतीय व्यवस्था में हिंदूवादी प्रभुत्व होने और अल्पसंख्यकों के दोहन की बात करने वाले उपरोक्त पुस्तक के लेखक स्वयं मुसलमान हैं और महाराष्ट्र पुलिस के आईजी रह चुके हैं। यदि मीडिया समूह के हाल के दुष्प्रचार का निहितार्थ निकालें तो हिंदूवादी संगठन उपराष्ट्रपति की हत्या इसलिए करना चाहते हैं, क्योंकि वह एक मुसलमान हैं। भारत की सनातनी बहुलतावादी संस्कृति पर यह घृणित लाछन क्या रेखाकित करता है?


जिस भाजपा पर मुस्लिम विरोधी होने का झूठा आरोप लगाया जाता है उसकी सरकार के दौरान ही डॉ. अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित किया गया था और उनके योगदान पर हर भारतवासी को गर्व है। इस बार आईएएस की परीक्षा में शीर्ष स्थान पर एक मुस्लिम को चुना गया। क्रिकेट और सिनेमा में बहुत से मुस्लिम बंधुओं ने किसी आरक्षण व्यवस्था के कारण अपनी पहचान नहीं बनाई है। यह मुकाम उन्हें अपनी प्रतिभा और बहुसंख्यक समाज के स्नेह के कारण मिला है। भारत में सभी मजहबों को समान अधिकार, संविधान की देन न होकर हिंदुत्व की संस्कृति और दर्शन से सिंचित है, किंतु सेकुलर विकृतियों ने हिंदुत्व को मुसलमान विरोधी बना रखा है। इसीलिए गोधरा को भूलकर गुजरात दंगों और राधाबाई चाल काड को गौण कर बेस्ट बेकरी की चर्चा होती है। आज देश का चालीस प्रतिशत हिस्सा नक्सली हिंसा का शिकार है। जिहादी इस्लाम का जहर कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुका है। बाग्लादेशी घुसपैठियों के कारण कुछ राज्यों के जनसंख्या स्वरूप में बदलाव के साथ आतरिक सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है, किंतु सेकुलर सत्ता अधिष्ठान हिंदू आतंक का प्रलाप कर रहा है, जिसे मीडिया के एक वर्ग से समर्थन मिल रहा है।


इस्लामी आतंक के कुछ चेहरे देखिए। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के शातिपुर थाने में पड़ने वाले मिदेपाड़ा लिचुतला में 12 जुलाई को मुसलमानों का गाजिर मेला चल रहा था। मेले में आए स्थानीय मुसलमान लड़कों के झुंड ने स्कूल से लौट रही 13-14 वर्षीय तीन हिंदू छात्राओं को अगवा कर लिया और दिनदहाड़े उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बाद में उन्हें मरणासन्न सड़क किनारे छोड़ चले गए।


हिंदू लड़कियों के साथ लौट रहीं घटना की चश्मदीद गवाह मुस्लिम छात्राएं कसूरवारो की पहचान से इनकार कर रही हैं। इस घटना की शातिपुर थाने में रपट दर्ज कराई गई, किंतु कोई कार्रवाई न होते देख पीड़ित पक्ष ने राजमार्ग संख्या 34 को जाम कर दिया। प्रशासन ने फौरन रैपिड एक्शन फोर्स बुला लिया। क्या सेकुलर मीडिया ने इस घटना की चर्चा इशरत जहा वाले मामले की तरह की? नहीं। क्यों? दूसरी घटना केरल की है। एक ईसाई कालेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ जिहादी युवाओ ने काट लिया। कथित तौर पर जोसेफ ने ईशनिंदा की थी। इसके पाच दिन बाद नीलाबर में यात्री ट्रेन के करीब बीस कूपों के हौजपाइप काट डाले गए थे। पिछले एक सप्ताह में केरल के जिहादी तत्वों के संगठन-पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के विभिन्न कार्यालयों से भारी मात्रा में गोलाबारूद और घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया गया। तटीय क्षेत्रों वाले इन हिस्सों में तबाही के सामान जुटते रहे और सरकार को इसकी सूचना नहीं रही। यह वस्तुत: वोट बैंक के लालच में काग्रेस और माकपाइयो द्वारा जिहादियों को गले लगाने का ही परिणाम है। चुनाव में कोयंबटूर धमाके के मास्टरमाइंड अब्दुल नासेर मदनी का साथ पाने के लिए काग्रेस और माकपा में होड़ लगती है। फिलहाल आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण मदनी की पत्नी सलाखों के पीछे है तो कर्नाटक पुलिस मदनी से अन्य आतंकी हमलों के बारे में फिर से पूछताछ कर रही है। इन सबकी चर्चा राष्ट्रीय मीडिया में क्यों नहीं?


इस्लामी आतंक का खतरा असम के जनसाख्यिक स्वरूप पर मंडरा रहा है। यही स्थिति रही तो पूर्वोत्तर एक बार फिर अलगाववाद की चपेट में होगा। यहा बाग्लादेशी घुसपैठियों को बसाकर आईएसआई उनका उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों में कर रही है। कुछ दिनों पूर्व काजीरंगा नेशनल पार्क में घुसपैठियों द्वारा बस्ती बसाने की सूचना सामने आई थी। इसके साथ ही यह भी जानकारी मिली थी कि मुस्लिम बहुल इलाकों में नक्सली सुरक्षित ठिकाने बनाने में सफल हो रहे हैं। जिहादी इस्लाम और नक्सली हिंसा से सभ्य समाज लहूलुहान है, आम जनता आकाश छूती महंगाई के कारण त्रस्त है। इन आसन्न खतरों का सामना करने के बजाए सेकुलर सरकार और मीडिया का एक वर्ग जनता का ध्यान भटकाने के लिए ‘हिंदू आतंक’ का हौवा खड़ा करना चाहता है, परंतु क्या हम इन वास्तविक समस्याओं के प्रति शुतुरमुर्ग वाला रवैया अपना कर भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे खतरों का सामना कर सकते हैं?

Source: Jagran Yahoo

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om prakash shukla के द्वारा
August 1, 2010

कांग्रेस की रजनीर का मूल आधार ही मुस्लिम तुष्तिकरद है आजादी के बाद से ही कांग्रेस इसी के बदुओलत १९७७ तक लगातार सत्ता में बनी रही और देश की समस्याओ को नजरंदाज केर के भी देशद्रोही तत्यो को आर्थिक,नातिक और सामाजिक समरथन देती रही.और बदले में उनके वोटो की तिजारत कराती रही और स्विस बांको में अपने नेताओ के खातो को समृद्ध कराती रही.मुसलमानों को जानबूझ केर अशिक्चित और पिचादा बनाये रखा गया इसके बदले में आम मुसलमानों को असमान नागरिक कानून का तोहफा दिया गया जो आम मुसलमानों को जाहिल और कट्टर मुओलानाओ के रहमो करम पैर छोड़ दिया गया जिससे आम मुस्लमान अपना भला बुरा सोचने से महुम केर दिया गया और इसतरह उन्हें मात्र एक वोत्बंक में तब्दील केर दिया गया और बार -बार बटवारे की यद् दिला आर.अस.अस.का भय दिखा केर अपना स्थायी समर्थक बना लिया गया.जिसका नतीजा है की अज कांग्रेस और उसके अपराधिक नीतिओ के चलते तमाम दल अपने अस्तित्य्व के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतिओ को मानाने और लागु करने को बाध्य हो चुके है.अज देश की सत्ता इनकी बंधक हो चुकी है.संसद पैर हमला काआरने वाले फासी की सजा पाए अफजल गुरु जेल में बिरयानी खा रहे है और संसद की रक्चा में शहीद हुए जवानों की विधवाए बीरता के लिए मिले सम्मान को वापस केर सजा के क्रियान्ययं के लिए आन्दोलन और विलाप कर रही है.एक मनोनीत प्रधान मंत्री जो जनता का सामना करने की हिम्मत कभी नहीं जूता पाया लेकिन बढचढ केर बयां देता है की देश के संशाधनो पैर पहला हक मुसलमानों को है.कैसे यह बताने की जरुरत नाटो वह समझता है और नहीं उसे पड़ा करने वाली उसकी शैडो मोम और युवराज की तो उम्र ही नहीं हुयी इस तरह की गूढ़ बातो पैर प्रतिक्रिया देने की.इससे बड़ी कांग्रेस की दोगली नीत क्या होगी की एक तरफ शहीद मूलचंद्र शर्मा को बतला हाउस मुठभेड़ के लिए बीरता पदक देती है और दूसरी तरफ अर्ध्विदेशी युवराज अपने हरकारे एक अपने ही महामंत्री को बाटला हाउस में मरे गए आतंकवादी के दरवाजे पैर हाजिरी लगा केर युवराज के दुओरे के लिए माहोल तयार करने के लिए भेज केर सर्वोच्च न्यायलय के निर्दय की धज्जिय उडाता जाँच की मग करता है.महान्राश्त्रावादी गुजरात के मुख्य मंत्री मोदी को आतंकवादियो के खिलाफ लड़ाई लड़ने में हेर तरह से हतोत्साहित किया जाता है.कभी आतंक के खिलफ उनके द्वारा भेजे गेर कानूनों को लुओताता है कभी इशरत जहा जैसे फियादीन को मासूम बना केर मोदी की छवि धूमिल किया जाता है और इस देश के सत्ता की चरण वंदना करने वाली मीडिया के माध्यम से गुजरात के झूठी सही अफवाहों फलाया जाता है लेकिन वही ५० से अधिक कारसेवको को जिन्दा जला देने की घटना को भूल केर भी यद् नहीं किया जाता.जो कांग्रेस अपने नक् के नीचे हजारो सिख्खो का नर्संघर कराती है और २५सल बाद भी न्याय के लिए एक को भी सजा नहीं दिला सकी उसे क्या अधिकार है गुजरात या दुसरे मामलो पैर बात करे जो कांग्रेस हजारो लोगो को भोपाल में मरने के लिए छोड़ उसके अपराधी को भागने में लगी रहती है वह मानवता की अपराधी है कांग्रेस बहाया हो चुकी है बेशर्मी इसका पर्दा हो चुकी है इसी लिए तमाम देशी विदेशी अखबारों में नेहरू गाँधी खंडन के स्विस बैंक खतो के बारे में नो. सहित पुरद विवरण आने के बाद भी कोई स्पष्टीकरण देने की जरुरत नहीं समझती.बेशर्मी से छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में नीरीह आदिवासियो के नर्संघर पैर कोई जाँच की बात नहीं कराती एक कुख्यात अपराधी और देश द्रोही के एन्कोउन्टर पैर सर मचाती है.इस तरह हम इसी निशाकर्स पैर पहुचाते है की कांग्रेस से बड़ी देश तोड़ने वाली अनतिक कोई दल या सर्कार नहीं इसकी जीतनी निंदा भ्रत्शाना की जय वह कम है.धम्निर्पेचाता का ढोग रचाने वाली कांगेस सबसे बड़ी धर्मिक विद्वेष फलने वाली पार्टी ठहरती है.एक तरफ हिन्दू देवी देवताओ की अनावश्यक नंगा चित्र बनाने वाले हुसैन के अभिव्यक्ति के नाम पैर समर्थन कराती है दूसरी तरफ अभिव्यति के लिए ही देश निकला और मुओत के फतवों से बचने के लिए हिंदुस्तान में शरण पाए तसलीमा नसरीन जैसे लेखिका को सामान्य शिस्ताचार की प्रवाह किये बगर हिरासत में ले केर देश निकला देती है एक बेवा शाहबानो के तलक पैर उसके हक में फासला आने पैर मुस्लिम्तुश्तिकरण का सबसे घ्रिदित प्रदर्शन करते हुए संविधान में संशोधन केर उसके तथा उस जैसे तमाम मजलूमों के हक का अपहरण करती है और इसके बाद भी बेशर्मी की पराकाष्ठ करते हुए अपने को धर्म्निर्पेक्चाता का चैम्पियन घोषित करती है.इससे बड़ा विरोधाभास विश्व राजनीत में मिलाना मुश्किल है सच्चर कमिटी और रंगनाथ मिश्र आयोग का गठन केर मुसलमानों के तुष्टिकरण का वधानिक आधार तयार करने वाली कांग्रेस यह बताने की जहात नहीं उठती की इसकी जिम्मेदारी किसकी है जब की इस पैर एक श्वेत पत्र लाना चाहिए क़ि आखिर विकास के दुओद में मुस्लमान इतने पिचादे क्यों रह गए लेकिन कांग्रेस यह कभी नहीं करेगी नहीं तो उसका घ्रिदित चेहरा सामने आ जायेगा,जिसका उसके पास कोई तर्क नहीं होगा सिवाय इसके क़ि उन्हें जानबूझ केर सर्कार अपने आश्रित और अपने रहमोकरम पैर रख उनका वोट लेती रही.कांग्रेस एक बार ही नेहारुगंधी खंडन के पकड़ से चूता और नरसिम्हाराव सत्ता में आये कांग्रेस के छद्म धर्म्निर्पेचाता का नकाब उतर गया मुसलमानों ने ऐसी पथाखानी दी क़ि फिर से अपने पारो पैर खड़ा होने में असमर्थ हो गयी अब बशाखी के सहारे घिसत रही है.इसी लिए अब और आक्रामक तरीके से धर्म्निर्पेचाता का तमाशा खड़ा केर रही है\’अब तो एकही फंदा रह गया है देश और आम आदमी जाय भाद में एकसूत्री कार्यक्रम रह गया है राहुल गाँधी को प्रधान मंत्री को कुर्सी पैर बताना राहुल अपने को अभी इसके काबिल नहीं समझाते वह बार-बार कह चुके लेकिन समझाना जरी है क़ि राहुल बाबा अब आप बड़े हो गए अब आपकी उम्र खिलुओनो से खेलने क़ि नहीं अब आप देश से खेलो चरण प्रधान से लेकर दस तक राग भरवी गा रहे है देखे कब तक बल हथ छोड़ बाबा बड़े होने के स्वांग में आते है.तबतक इंतजार कीजिये. d

manish के द्वारा
July 23, 2010

कांग्रेस को अपने कराये हुए दंगे याद नहीं आते…..

ramesh yadav के द्वारा
July 23, 2010

congress bhadwagiriki poltics karti hai rahul ghanghi bhadwa hai mulayam bhadwa hai lalu bhadwa hai sabhi muslimo ke hitaisi bhadwe hai

डा. एस. शंकर सिंह के द्वारा
July 22, 2010

हिन्दू संस्कृति और परंपरा में आतंकवाद का महिमामंडन नहीं किया जाता है हिन्दू आस्था में न तो जिहाद है और न काफ़िरों को मारने वालों को जन्नत नसीब कराने का प्रावधान है. अगर कोई हिन्दू हिंसक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो वह हिन्दू नहीं बल्कि अपराधी है. उसके साथ एक अपराधी जैसा ही बर्ताव किया जाना चाहिए

kmmishra के द्वारा
July 21, 2010

सब सानिया माईनो की कृपा है ।

    ramesh yadav के द्वारा
    July 23, 2010

    thank u brother

अनिल के द्वारा
July 21, 2010

आतंकवाद आज भारत के सामने सबसे बडा मुद्दा है और उससे भी ज्यादा यह भयावह हो रहा है इसके क्षेत्रयितावाद से….

विनय के द्वारा
July 21, 2010

आतक का कोई नाम नही होता वह न हिंदु होता है न मुस्लमान न ही ईसाई…वह सिर्फ आंतक का ही नाम होता है.


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