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हमारी प्रेरणा हमारा प्रोत्साहन पिता तुझे शत-शत नमन

Posted On: 20 Jun, 2010 में

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fathar1माँ के पूरक रूप के ममत्व और प्रेम की छाया हम सभी पर कभी ना कभी अवश्य रही है. हमें जब भी जरूरत हुयी पिता ने हर कष्ट सह कर भी हमारी उस जरूरत को पूरा किया. वो हँसना-हँसाना, रूठना-मनाना चलता रहा फिर भी पापा की सबसे बड़ी चिंता यही रही कि कैसे हमारा जीवन सुखी रहे, कैसे वो खुद ही हमारे सारे दुःख हर लें और दुनियां की सारी खुशियाँ हमारी झोली में डाल दें.

 

father2आज जिन्दगी में बढ़ रहे तनाव और भागमभाग ने पिता और हमारे बीच दूरियां ला दी हैं. बड़े शहरों में तो कई लोग इतने स्वार्थी हो चुके हैं कि अपने बूढ़े पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ देते हैं. क्या इससे भी बढ़कर हैवानियत कुछ और हो सकती है. जब पिता को हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो हम उनसे मुंह मोड़ लेते हैं. जबकि उसी पिता ने अपने अरमानों का खून करके हमारी हर खुशी के लिए सब कुछ किया.

 

दुनियां में सबसे पहले फादर्स डे 19 जून, 1910 को वॉशिंगटन में मनाया गया था. सोनेरा स्‍मार्ट डोड नाम की महिला ने इसे मनाने की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे फादर्स डे मनाने का चलन लगभग पूरी दुनियां में फ़ैल गया.

 

जून माह के तीसरे रविवार को मनाया जाने वाला फादर्स डे इस बार 20 जून को है. हमें भी इस दिन अपने पापा को ब्लॉग के माध्यम से अपनी कृतज्ञता अर्पित करनी चाहिए और सारे जहाँ को पिता के प्यार और उनके महत्व से रूबरू करवाना चाहिए.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ravindrakkapoor के द्वारा
August 17, 2010

यह एक अच्हा सुझाव है . बदलते समय में संतान और माता पिता के बीच बढ़ती दूरिया तभी कम हो सकती है जब हम बच्चो मे माता पिता के बीच मित्रता की भावना को डाल सकें और इसकेलिए आप विचार सुंदर और मूल्यवान है . मेरी सुभकामनाएँ …… रवींद्र के कपूर

razia mirza के द्वारा
June 22, 2010

आज मेरे पिताजी के देहांत को सोलाह दिन हो चले। आपकी पोस्ट ने आँखें भरदी मेरी।

    samta gupta kota के द्वारा
    June 22, 2010

    परमपिता आपके पिता की आत्मा को शांति दे,जब भी पिता की याद आये उन्हें परमपिता मैं ढूँढो वो दिखाई देंगे,

Dr. Divya के द्वारा
June 20, 2010

सही कहा आप ने की हमारी प्रेरणा हमारा प्रोत्साहन हमारे पिता ही हैं, हर ख़ुशी में साथ हर दुःख में साथ ……………….. मेरे पापा ने हर कदम पर मेरा उत्साहवर्धन ही किया है. जीवन के हर मोड़ पर हर पल किसी का सहारा मैने पाया तो वो मेरे पापा ही हैं. हर किसी के प्यार में कोई न कोई स्वार्थ निहित होता है पर पापा का प्यार हमेशा मेरे लिए निःस्वार्थ रहा . और मैं चाहती हूँ कि यही प्यार मेरी बेटी को उसके पापा से मिले ……………………………..


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