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एंडरसन को बचाने वाला हाथ

Posted On: 14 Jun, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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भोपाल गैस त्रासदी के मामले में दिए गए फैसले और उस पृष्ठभूमि में यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वारेन एंडरसन को भारत से सुरक्षित भागने में सहायता के प्रसंग ने देश का सिर झुका दिया है। अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए के 26 वर्ष पूर्व के गोपनीय दस्तावेजों को जनवरी 2002 में सार्वजनिक किया गया था। इन दस्तावेजों में उल्लिखित है कि मध्य प्रदेश पुलिस की कैद से यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वारेन एंडरसन को ‘दिल्ली’ के दबाव से 8 दिसंबर, 1984 को रिहा किया गया। इसका कारण यह बताया गया कि तत्कालीन केंद्र सरकार यह मानती थी कि वारेन एंडसरन की कैद को मध्य प्रदेश सरकार राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।

 

उधर, मध्य प्रदेश के दस्तावेजी प्रमाण बताते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने वारेन एंडरसन को विशेष विमान से भोपाल से भाग जाने की सुविधा उपलब्ध करवाई थी। काग्रेस अर्जुन सिंह पर वार कर रही है, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाधी को बचा रही है, जबकि अमेरिकी अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी ने संकेत दिया है कि उनके कहने पर ही अर्जुन सिंह ने एंडरसन को रिहा किया होगा। वंशवादी राजनीति का यह दोहरा चरित्र राष्ट्रघातक ही रहा है। अर्जुन सिंह और राजीव गाधी, दोनों ही काग्रेस के नेता रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना ही रहा कि एक गाधी-नेहरू खानदान के थे तो दूसरे ‘बाहरी’।

 

अर्जुन सिंह ने चाहे काग्रेसी आकाओं को खुश करने के लिए कितनी ही जूतिया तोड़ी हों, राष्ट्रीय हितों एवं हिंदू संवेदनाओं पर भीषण प्रहार किए हों, मुस्लिम तुष्टीकरण की हदें पार कर दी हों, पर जीवन के संध्याकाल में वह काग्रेस द्वारा ‘त्याज्य’ घोषित हो गए। उन पर प्रहारों का न सिर्फ काग्रेस मजा ले रही है, बल्कि अपनी तरफ से भी और आघात कर रही है, लेकिन उसी अपराध में राजीव गाधी का नाम आते ही वंशवादी राजनीति के दरबारी एक सुर में ‘राजीव निर्दोष हैं’ अलापने लगे।

 

2 और 3 दिसंबर, 1984 को हुई भयावह दुर्घटना में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से हजारों लोग मारे गए थे। पशुओं के मारे जाने की संख्या का एक लाख के लगभग आकलन किया जाता है। प्राय: पाच लाख लोग जहरीली गैस के कारण अंधे हुए या भयंकर जानलेवा बीमारियों के शिकार हुए। 1984 से चल रहे मुकदमे का 2010 में फैसला आया, लेकिन यह न्यायिक त्रासदी भोपाल गैस रिसाव त्रासदी जैसी ही भयंकर है। इन 26 वषरें में जहरीली गैस प्रभावित जनता ने कैसे जिंदगी जी और किस तरह प्रभावित परिवार के अनाथ बच्चे बड़े हुए, यह मानवीय इतिहास की एक लोमहर्षक कथा है, लेकिन क्या राजनेताओं की नींद पर इससे कोई असर पड़ा?

 

क्या जिन राजनेताओं ने हजारों की मौतों एवं लाखों को अपंग बनाने के जिम्मेदार अपराधी को सरकारी सुविधाएं देकर भारतीय कानून की गिरफ्त से छूटने में मदद दी, उनकी आखों में हिंदुस्तान था या वे अमेरिकी दबाव में उसी तरह सिर झुकाए हुक्म का पालन कर रहे थे जैसे वर्तमान संप्रग सरकार पाकिस्तान से वार्ता एवं परमाणु दायित्व विधेयक के बारे में कर रही है? विडंबना है कि न केवल भोपाल गैस त्रासदी के अपराधियों को उचित सजा नहीं दी गई, बल्कि उनको भगाने वालों के प्रति भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। केंद्र चाहे तो अपने नियंत्रण वाली सीबीआई द्वारा भी जाच करवा सकती है, लेकिन तब भी उसे डर होगा कि जाच में राजीव गाधी की भूमिका का भी पर्दाफाश हो जाएगा। दुर्भाग्य से 1984 के अपराधियों को बचाने की यह घटना यूनियन कार्बाइड तक सीमित नहीं है। उसी वर्ष सिख विरोधी काग्रेसी हमलों में तीन हजार निरपराध सिखों के कत्लेआम के अपराधी भी इसी काग्रेस सरकार द्वारा बचाए जाते रहे हैं।

 

अदालतों का कमजोर गठन, सबूत प्रस्तुत करने में लापरवाही, सरकारी तंत्र के उपयोग द्वारा संदिग्ध अपराधियों को निर्दोष साबित करने के उपक्रम काग्रेसी वंशवादी राजनीति का राष्ट्रघातक चेहरा है। इसी वजह से जनता का उन तमाम न्यायिक संस्थानों से विश्वास हटता जा रहा है, जो लोकतात्रिक व्यवस्था के आधारस्तंभ हैं। सीबीआई को संप्रग ने राजनीतिक लाभ एवं भयादोहन का साधन बनाकर सत्ता-केंद्र की निष्पक्षता पर बहुत बड़ा आघात किया है। न्यायपालिका भी निरंतर ऐसी ही संदेहास्पद चर्चाओं के दायरे में घिरी रही है। सवाल उठता है कि जनता निष्पक्ष एवं वस्तुपरक शासन तथा न्याय की आस किससे करें? यह राष्ट्रीय जीवन व्यवहार एवं लोकतात्रिक राजनीति के लिए बहुत बड़े खतरे के संकेत हैं। जिनसे रक्षा की उम्मीद हो यदि वही आघात करने लगें और जिनसे न्याय की आशा हो वही अन्याय करते पकडे़ जाएं तो नतीजा विस्फोटक हो सकता है।

 

भोपाल भारत की क्रूरतम त्रासदियों में से एक है। जो अंध सेकुलर गुजरात दंगों के बारे में केवल इसलिए मुखर होते हैं क्योंकि उनको लगता है कि गोधरा पर चुप्पी और गुजरात पर मुखरता से उनका सेकुलर रंग निखरता है, वे भोपाल गैस त्रासदी में अधिकतम मुस्लिमों के मारे जाने पर भी क्यों चुप हैं? शायद इसलिए क्योंकि उन्हें काग्रेसी सरकारों की तिजोरियों से जो कुछ मिलता रहा, उसकी अदायगी काग्रेसी गुनाहों पर चुप्पी साधकर ही की जा सकती है। भोपाल गैस त्रासदी का जिम्मेदार एंडरसन उतना ही बड़ा अपराधी है, जितने बड़े अपराधी अफजल और कसाब हैं। दोनों ही विदेशी हैं और दोनों ने ही भारतीय राज्य एवं नागरिकों के प्रति अपराध किया है। अत: दोनों की सजा में भी फर्क क्यों होना चाहिए?
Source: Jagran Yahoo

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pradeep Bhardwaj के द्वारा
June 16, 2010

उन शहीदों की मजारों पर जलता नहीं दिया !, जिनके लहू से जला करता था चिराग ऐ वतन.! महल उनके जगमगा रहे हैं, जो बेचा करते थे.! ……………………….. शहीदों के कफ़न !! आज ………….. अपनी बांबी से जब निकलते हैं दूध पीते हैं, विष उगलते है. ऐसे जहरीले नाग काले तो, अपनी संसद में खूब पलते हैं. प्रस्तुति …..द्वारा प्रदीप भरद्वाज

बी. एन. शुक्ल के द्वारा
June 16, 2010

बिलकुल सही कहा आपने। प्रारम्भ से ही काँग्रेस का यही चरित्र रहा है। यह देश का दुर्भाग्य नही तो और क्या है कि ऐसे ही राज नेता देश पर राज कर रहै हैं और लोग चुप हैं. क्या यह लोगों के नपुन्सकता वाली सोच में बदलाव आएगा।

subhash के द्वारा
June 15, 2010

anderson ko bhagane ki sajish ka pardafas hona chahiye aur rajiv arjun ne kitna dhan kamaya uski bhi padtaal ho taki dudh se dhule nehru parivar ki asaliyat samne aaye

Dheeraj के द्वारा
June 15, 2010

भोपाल गैस कांड वाकई में भारत के लिए बहुत बड़ी त्रासदी थी और सुप्रिमे कोर्ट का निर्णय देश और हमारे न्यापालिका के लिए भी एक त्रासदी से कम नहीं हैं…इस निर्णय को क्या कहे , इन्साफ या फिर इन्साफ का ढकोसला. लाखो लोग इस त्रासदी में मारे जाते हैं और लाखो या तो लाचार हो जाते हैं या फिर जिंदिगी नयी ढंग से शुरवात करने के लिये जदोजहद करना पढता हैं. और लगभग २० साल के बाद एक निर्णय आता हैं जो उनको या बतलाता हैं कि भइया तुम ठरह गरीब लोग तुमलोगो को इन्साफ केसे मिल सकता हैं……तुमलोगों के इन्साफ का लिए केवल बाते कि जा सकती हैं लकिन सॉरी इन्साफ नहीं किया जा सकता हैं….क्योंकि अगर आपको हम इन्साफ दे देंगे तो फिर उनको क्या देंगे जो हमे fincial हेल्प करते हैं………आप तो सिर्फ हमे vote देते हैं लकिन वो vote न भी दें लकिन वो सब देते जिसके लिये हम यहाँ हैं…..और रही बात तो लोगो कि समझा देंगे कि दवाब था internationl / National , क़ानून वयवस्था खराब होने का डर था ….काफी कुछ हैं कहने के लिया…. कह देंगे. वो सरकार केसी जो अपने लोगो को एक न्यया भी नहीं दिलवा सकती……..रही बात दवाब कि तो कभी एसा समय नहीं आयगा जब आप पर internationl दवाब न हो इसलिय ये सब बेकार कि बाते हैं कि दवाब और क़ानून वयवस्था खराब होने का डर था.

    बी. एन. शुक्ल के द्वारा
    June 16, 2010

    कानून तो शुरु से ही पैसे वालों की रखैल रहा है, इसमें आश्चर्य कैसा।

Deepak Jain के द्वारा
June 15, 2010

भोपाल गैस कांड वाकई में भारत के लिए बहुत बड़ी त्रासदी थी परन्तु एंडरसन को लेकर आज जो आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है और जिस तरह से राजीव गाँधी जी और अर्जुन सिंह जी का नाम उछाला जा रहा है ये सही नहीं है आज राजनीती में भावनाओं की कोई क़द्र नहीं होती मई मानता हूँ की एंडरसन को भगाने में इनका हाँथ रहा होगा परन्तु १९८४ के समय के भारत के बारे में एक बार हमे सोचकर देखना चाहिए तब शायद हमे उनका फैसला गलत ना लगे और उस समय की बात तो जाने दो आज भी बहुत सरे फैसले हमे अमेरिका के दबाव में लेने पड़ते हैं मैं आपकी भावनाओं की कद्र करता हूँ और आज मुझे भी भोपाल गैस कांड के बारे में सुनकर बहुत दुःख पहुँचता है परन्तु देश को चलाने के लिए कई बार हमे ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो जनता के नजरिये से गलत होते हैं परन्तु अप्रत्यक्ष रूप से वे देश हित में होते हैं और देश के हित के साथ ही जनता का हित भी जुड़ा है और ये मेरे अपने विचार हैं शायद आप मेरे इन विचारों से सहमत न भी हों परन्तु सभी को एक बार इस बार में सोचने के जरुरत है दीपक जैन

    subhash के द्वारा
    June 15, 2010

    aapke hisab se to kasab ne jo kiya vo bhi thik tha kyonki uski bhi koi majburi hogi 25000 logo ki mout ke baad aapke rajiv ji ki responsibilty apradhi ko saja dilane ki thi na ki sarkari viman se vides bhejne ki saayad aapka koi relative is durghatna ka sikar nahin hua

    डा. एस. शंकर सिंह के द्वारा
    June 15, 2010

    हम किसी बादशाहत में नहीं रह रहे हैं. लोकतंत्र में हरेक की ज़िम्मेदारी निर्धारित की जाती है. सच तो सामने आना ही चाहिए. सच से आँख चुराने की क्या ज़रुरत है.

    Deepak Jain के द्वारा
    June 16, 2010

    Subhash G Maine pahle bhi kha hai rajniti me bhawanon ki jyada ahmiyat nahi hoti aur aap ksab ke kam ke tulna bhopal gas cand se kar rhe hain jo sarasar galat hai bhopal gas cand ek technical falt tha union carbide ke adhikariyon dwara janbhujhkar kisi ko marne ka koi irada nahi tha phir bhi unke dwara galti jarur huyi jiske liye o saja ke hukdar jarur the parantu endarsan koi aaankwadi nahi tha aur mai ye bat phir se kahna chunga ki endarsan yadi rajiv gandhi g ne endarsan ko desh se bhagaya to isme unka koi personel fayada nahi tha us time pure world me america ka dabdba tha aur bharat ke aarthik halat bhi theek nahi the to ho sakta hai usko bhagana unki majboori rahi hogi aur aap sirf endarsan ko hi kyun dekhte ho baki apradhiyon ko bhi to dekho kya hua unka 2 sal ki saja aur turant jmant per riha ab aap kya kahenge ke desh ke kanoon bhi galat hain yadi enderson pe bhi cash chalta to uska kya hota aap hi btao kya usko fansi ki saja mil pati kadapi nahi o bhi anya apradhiyon ki trah bari ho jata aur pradhan mantri ki kursi pe baithkar sare faise dil se nahi dimag se bhi liye jate hain aur aap ye bat achi trah se jante honge yadi meri is pratikriya se aapko koi aghat pahuncha ho to mai iske liye aap logon se mafi chahunga per ek bar thande dimag se aap is per soch ke dekhiye

dr ashish dixit के द्वारा
June 14, 2010

भोपाल गैस कांड मानव जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी है.पर ये एक दुर्घटना थी.जिसके किये समय जिम्मेदार था,कोई नेता नहीं.राजीव गाँधी आज के युग का नेता नहीं है,वो दूरदर्शी नेता था,उसकी सोच मैं मजबूत भारत की तश्वीर थी,उस समय की परिस्थिति क्या रही होगी इसका अंदाजा हम आज नहीं लगा सकते

    subhash के द्वारा
    June 15, 2010

    tabhi to des mian boforce scandle hua tha chamchagiri chodiye janab

kmmishra के द्वारा
June 14, 2010

क्रांगेस का हाथ सदैव देशवासियों की गर्दन पर ही होता है । इस काण्ड में राजीव गांधी की क्या भूमिका थी इस की हमें शायद ही कभी जानकारी हो पायेगी ।

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 14, 2010

मुझे तरस आता है हमारी संवेदनहीनता पर कि त्रासदी के 26 वर्ष तक हमारे राजनीतिक दल, नेता मानवाधिकारवादी, बुद्धिजीवी और ख़ास तौर से इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया सभी चुप रहे. आज न्यायालय का निर्णय आने के बाद सभी अपने जौहर दिखा रहे है. क्या मीडिया को यह नहीं पता था कि एंडरसन को जान बूझकर \\\’ सेफ पैसेज \\\’ दिया गया. क्या यह चुप्पी अपराधिक नहीं है. मुझे आश्चर्य होता है कि इस चुप्पी का कारण क्या है. कांग्रेस वाले और सल्तनत के वफादार इसका दायित्व उस समय मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री अर्जुन सिंह पर डाल रहे हैं. माना एंडरसन को हवाई जहाज उपलब्ध कराने में उसके भागने का प्रबंध करने में राज्य सरकार और मुख्य मंत्री की प्रमुख भूमिका थी. उसके विरुद्ध आरोप की गंभीरता को कम किया गया. यह जानना ज़रूरी है कि यह सब किसके इशारे पर किया गया. क्या राज्य का मुख्य मंत्री अपने बल पर किसी अपराधी को देश से बाहर भगाने का निर्णय ले सकता है. इसमें दिल्ली की केन्द्रीय सरकार और तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री राजीव गाँधी की क्या भूमिका थी यह जानना ज़रूरी है. क्या यह सब कुछ उनके आदेश पर हुआ, यह बात अविश्वसनीय है कि राज्य का मुख्य मंत्री बिना प्रधान मंत्री की इजाज़त के किसी अपराधी को देश से बाहर भगाने का निर्णय ले सकता है. प्रणब मुख़र्जी की बात हास्यास्पद लगती है कि कानून व्यवस्था को बिगड़ने से बचाने के लिए एंडरसन को भाग जाने दिया गया. राज्य सरकार अगर क़ानून व्यवस्था भी नहीं बनाए रख सकती है तो क्या करेगी. कांग्रेस इस काम में माहिर है. ओट्टावियो क्वात्त्रोची को भी भाग जाने दिया गया था. जब कभी सल्तनत के किसी व्यक्ति का नाम किसी गलत सन्दर्भ में आता है सल्तनत के वफादार और चाटुकार झपट पड़ते हैं. ज़ाहिर है अर्जुन सिंह को बहुत कुछ पता है. लेकिन उन्होंने मौनव्रत धारण कर रखा है. शायद वह चुप रहने की कीमत वसूल करने के बारे में बात चीत कर रहे होंगे. हो सकता है केन्द्रीय मंत्री मंडल में न सही तो कीई प्रदेश के गवर्नर की कुर्सी ही मिल जाय. लगता है एंडरसन को भगाने में अमेरिका का डंडा भी एक कारण हो सकता है. इसमें मध्य प्रदेश की राज्य सरकार से लेकर .दिल्ली की केन्द्रीय सरकार, सी बी आई और पुलिस व नागरिक प्रशासन सभी शामिल थे.

jack के द्वारा
June 14, 2010

यह हाथ क्रांगेस का था जो आज भी हमें  मारने मॆं लगी है. क्रागेस की यह चाल कभी नही बदलेगी.

    बी. एन. शुक्ल के द्वारा
    June 16, 2010

    फिर भी काँग्रेस की जूतियाँ साफ करते रहेंगे।

    kanhaiya lal phulwariya के द्वारा
    July 8, 2010

    दोस्तों भारत की जनता और मिडिया सभी भुल्कड़ है! कयोंकि कुछ दिनों पहले तक एंडरसन का मुद्दा कांग्रेस के खिलाफ मिडिया और जनता ने जोरो से उछाला था!जो कांग्रेस के वोट बैंक को बुरी तरह प्रभावित कर रहा था.जनता में कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त आक्रोस था! लेकिन कांग्रेस भी कम चालाक नहीं है.वो जानती है भारत की जनता भुल्लकड़ है? इस मुद्दे को दबाने के लिए और जनता और मिडिया का धयान दूसरी तरफ मोड़ने के लिए सोची समझी चाल के तहत पट्रोल और डीजल के दामो में बढ़ोतरी कर के कांग्रेस अपनी चाल में सफल होगई! आज जनता और मिडिया एंडरसन के मुद्दे को छोड़कर मंहगाई की और चिल्लाने लग गए? ये है भारत की मिडिया और जनता का हाल! इस देश को भगवन ही बचाए? इस मुद्दे की जगह यदि मायावती का कोई मुद्दा होता तो इस देश की मिडिया और मनुवादी लोग हाथ धोकर मायावती के पीछे पड़ जाते! कयोंकि वो दलित समाज में जन्मी एक दलित की बेटी है?देश का मिडिया हमेशा पक्षपात करता है. इसमें कोई शक नहीं है………….


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