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क्रूर दमन ही एकमात्र विकल्प

Posted On: 18 May, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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एक और नक्सली हमला और कई लोगों की मृत्यु. सरकारी फाइलों में फिर दर्ज होगा इन सब का नाम और दान या मुवावजे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं भी की जाएंगी. दांतेवाड़ा में इससे पूर्व 6 अप्रैल को भी एक बड़ा ही सुनियोजित हमला हुआ था. जिसमें 76 जवान मारे गए थे. इस बार आम नागरिक मारे गए हैं. नक्सली समर्थक प्रपंचवादी दलालों की ये एक बड़ी विजय है. सरकार दब गयी और उसने कोई भी कार्यवाही करने की जुर्रत नहीं की.

 

वैसे एक बात तो तय है कि आज देश में फैली इस भयावह विभीषिका के पीछे सरकार की हीलाहवाली ही जिम्मेदार है. अभी हम पिछले नक्सली हमले के बाद की गयी सरकारी कार्यवाही पर नजर डालें तो पता चल जाएगा कि वह देश के नागरिकों की जान की कीमत क्या समझती है.

 

पिछले हमले(6 अप्रैल) के बाद सरकार ने ना तो वहॉ के स्थानीय प्रशासन के विरुद्ध कुछ किया और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कदम उठाए. उसने ये तथ्य भी नहीं जाहिर होने दिया कि जंगल में ऑपरेशन के दौरान पीछे से कौन कमांड कर रहा था. क्या इतने अधिक जवान बिना किसी के निर्देश के ऑपरेशन में संलग्न हुए.

 

जंगल के भीतर मोबाइल या अन्य किसी भी माध्यम से सन्देश देने के लिए क्या व्यवस्था की गयी थी. कमांडिंग और सपोर्ट ग्रुप क्या कर रहा था.

 

आखिर नक्सलियों को कौन सूचना दे रहा है?

 

यह बात तो कभी भी आसानी से हजम नहीं होगी कि आमजन नक्सलियों के लिए गुप्तचर का काम करेगा. सत्ता, प्रशासन और पुलिस में से ही कोई है जो नक्सलियों का हिमायती बना हुआ है. ऐसे लोगों को चिन्हित क्यों नहीं किया जा पा रहा है.

 

तमाम आपराधिक व्यक्तियों का संसद और विधानसभाओं में प्रवेश एक बेहद खतरनाक संकेत है. आपराधिक तत्वों से मिले हुए लोगों या अभी भी सक्रिय रूप से अपराध में शामिल नेताओं के चरित्र का कोई भरोसा नहीं होता. वे सिर्फ पैसे और सत्ता की खातिर देश को बेच देने में कोई गुरेज नहीं करने वाले. क्या देश ऐसे लोगों के ऊपर अपनी सुरक्षा का दायित्व छोड़ कर निश्चिंत हो जाए?

 

छद्म मानवाधिकारवादियों और दलाल बुद्धिजीवियों को पकड़कर क्यों नहीं बंद कर दिया जा रहा है? ये शैतान सिर्फ अपने क्षुद्र लाभ की खातिर नक्सली आतंकवादियों के लिए सहानुभूति का वातावरण तैयार कर रहे हैं.

 

क्रूर दमन ही एकमात्र विकल्प

 

देश के खिलाफ किसी भी तरह के कृत्य अब भी क्यों बर्दाश्त किए जा रहे हैं, इसका जवाब दिए बिना काम नहीं चलने वाला. वक्त आ गया है कि जनता स्वयं आगे आकर जनतंत्र के मसीहाओं से हिसाब मांगे.

 

जरूरत है कि अब सेना और हवाई हमले का विकल्प अपनाने में और विलंब ना किया जाए. राष्ट्र की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए. किसी भी वाद-विवाद और बहस की कोई गुंजाइश बाकी नहीं है. अब सिर्फ दमन और क्रूर दमन ही एकमात्र विकल्प शेष है.

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subodhkantmisra के द्वारा
May 30, 2010

जिस देश में आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कानून बनाने के विचार से ही गन्दी राजनीति शुरू हो जाती हो, उन नक्सलियों के खिलाफ वायु सेना के इस्तेमाल के विचार से ही कथित बुद्धिजीवी उनकी तरफ दारी में लग जाते हो जिनके सम्बन्ध लश्करे तोयबा से बताये जा रहे है,उस देश में तो अभी हमें और लाशें गिनने का इंतज़ार करना होगा इन कायर नेताओ में संकल्प शक्ति और ठोस निर्णय लेने की क्षमता नहीं है!

subhash के द्वारा
May 20, 2010

jab des ka pm hi kisi aur ke haath ki kathputali ho to koi sahsi nirnay kaise le sakta hai pm ka dhyan ssayad mata ji ki aarti utarne main rahta hai des jaaye bhad main des ek kamjor pm ki saja bhugat rha hai

kushal के द्वारा
May 19, 2010

Today even a common man knows who are naxals, what are their motto, under what circumstances they have evolved over time and reign of terror they are captivating. But where is government are they deaf? Do they don’t share any responsibilities or they are playing their b****y politics in this front too. Do they don’t care for the lives of our brave soldiers who are thrown into the abyss as dark as that take their life away or we have to urge our army to take control of the situation.

अभय के द्वारा
May 19, 2010

सही कहा अब तो ताकत का ही इस्तेमाल होना चाहिए. क्योंकि लातों के भूत बातों से नही मानने वाले.

    dr.divya के द्वारा
    May 19, 2010

    मैं आप से सहमत हू ,अब एकमत हो कर ये कदम उठाना ही हो गा

Chaatak के द्वारा
May 18, 2010

जागरण ने दो टूक बिलकुल सही बात कही है, मैं स्वयं संयम एवं अहिंसा का कट्टर पक्षधर हूँ लेकिन यहाँ पर मेरे विचार पता नहीं क्यों अपने आदर्श महात्मा गांधीजी से बिलकुल विपरीत दिशा में चले जाते हैं. कोई भी हमारे देश के जवानों को, निरीह जनता को यदि राजनैतिक या सामरिक इच्छापूर्ति के लिए क़त्ल करता है तो हम चुप बैठ कर अपनी नपुंसकता दिखा रहे हैं, इस मुद्दे पर कोई बहस या किसी प्रकार का मानवादिकारवादी विचार ही बेमानी हो जाता है. जीवों पर दया करना जायज़ है लेकिन जब कुत्ता पागल हो जाये तो उसे गोली मारना भी उसके ऊपर रहम करना ही है. हमारे जवान किसी भी नक्सली प्रभाव को मसलने में सक्षम हैं लेकिन नपुंसक नेता और शिखंडी सरकार मानो अभी भी बेगुनाहों कि बलि पर राजनीति के कोठे पर रक्स करना चाहती है, राजनैतिक प्रतिबधता मानो इन दलालों के दिलो-दिमाग में ही दम तोड़ चुकी है, मेरे इन असम्मान जनक शब्दों को मेरी मातृभूमि क्षमा करे.

    sunny rajan के द्वारा
    May 19, 2010

    Chatakji अब पानी सिर से ऊपर हो गया है अब अहिंसा की बात करना बेकार है नक्सलवादी आतंक फैलाते जाए और हमारे सुरक्षाकर्मियों का क़त्ल करते जाए और हम सहते. कुशल जी मैं आपके वचनों से पुरी तरह सहमत हू.

    nupur singh के द्वारा
    May 19, 2010

    अब सरकार नहीं जागी तब कब जागेगी??????????? जब उस के कुछ नेता मारे जायेगे .

garima के द्वारा
May 18, 2010

certainly this is the time to show to the nexalites tit -for-tat. As far as the question of human rights it is for human beigns only and not for animals like them. Our ministers and the so called humanright protestors will understand this fact only if they will lose their near & dears. I strongly favoure peace in the nation, it is very much essential for growth and development, but there should be a limit for everything, enough is enough, now we should not give a single chance to these enemies of peace.

vats के द्वारा
May 18, 2010

ये बात बिलकुल सही है कि नक्सली और आतंकवादी कोइ दो नहीं बल्कि एक ही हैं. सामान्य निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों के किसी समर्थक को भी आतंकवादी घोषित कर जेल में दाल देना चाहिए. लिट्टे का जिस प्रकार दमन किया गया क्या वैसा ही दमन हम नहीं कर सकते? क्यों नक्सली आतंकियों को छूट मिली हुई है? अविलम्ब दमन देश की की मांग है. इस पर किसी बहस को चलाने की जरूरत नहीं.

    DR S .N.MISHRA के द्वारा
    May 19, 2010

    ये तो आतंकवादी से भी खतरनाक है .

    navya vats के द्वारा
    May 19, 2010

    सही कहा आप ने ……………..


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