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दरकती नींव की महागाथा

Posted On: 24 Apr, 2010 बिज़नेस कोच में

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भारत में वैसे भी भ्रष्टाचार एक सामाजिक आचरण में तब्दील हो चुका है इसलिए आईपीएल के मामले में आए नए भ्रष्टाचार के मसले ने कोई ख़ास आश्चर्य ही नहीं पैदा किया. हालांकि इससे यह बात जरूर पक्की हो गयी कि देश में काफी कुछ बदलने की आवश्यकता आ चुकी है. इस बात को हमें भलीभांति समझ लेना होगा कि यदि वाकई हमें विकसित देशों की कतार में खड़ा होना है तो व्यवस्थागत परिवर्तन लाना ही होगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण नेहरू ने इस आलेख में कुछ बेहद महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किया है.

 

आइसलैंड में ज्वालामुखी विस्फोट से यूरोप काफी अस्तव्यस्त है, लेकिन मेरा ध्यान तो अपने यहां फटे ज्वालामुखी पर है। इस समय पूरे देश पर क्रिकेट का बुखार चढ़ा है। आईपीएल के सेमीफाइनल मैच हो चुके हैं। उधर बीसीसीआई और आईपीएल में जारी मैच में भी कई तरह के खुलासे हो रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि इस तरह के कुछ बड़े वित्तीय खुलासे कम्युनिकेशन, रियल एस्टेट, भूमि अधिग्रहण, नागरिक उड्डयन, खनन और बेनामी नकदी के मामलों में भी सुनाई दें।

 

निश्चित तौर पर इस तरह के आपराधिक कारनामों के खुलासे हमारी सरकार के सुशासन को अप्रासंगिक ठहराते हैं। देश के विभिन्न राज्यों में यह प्रवृत्ति पहले से देखने में आ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है। हमारे पास अभी तक सही प्रणाली का अभाव है, लेकिन सुशासन की एक सही प्रणाली तो हम बना ही सकते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि वर्तमान संकट के बाद गलत गतिविधियों में संलग्न तमाम लोग फिर से उठ खड़े हों। केवल आने वाला समय ही यह बताएगा कि इस तरह की स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए हमारी व्यवस्था कितनी मजबूत होती है।

 

बीसीसीआई और आईपीएल विवाद पर मीडिया और आम जनता का काफी ध्यान गया। लेकिन इसका न तो कांग्रेस के राजनीतिक हितों से कोई मतलब था और न ही भाजपा, ललित मोदी, शशि थरूर अथवा किसी अन्य व्यक्ति विशेष के हितों से। इसका मतलब था तो खेल में लगी अत्यधिक पूंजी और वर्तमान व्यवस्था से, जिसकी वजह से इस तरह के आपराधिक कारनामे को अंजाम देना संभव हुआ। इस पूरे लेन-देन के मामले में सुरक्षा का प्रश्न सबसे बड़ा मुद्दा रहा। हमें मीडिया की खबरों से छापों के बारे में पता चला। मैंने सोचा कि अब हमें कुछ बड़े घोटालों की जानकारी मिलेगी। मुझे बहुत हैरत होगी यदि बीसीसीआई और आईपीएल इस जांच से बच निकलें। उम्मीद है कि अब कुछ बड़ी मछलियों का पत्ता साफ होगा।

 

जहां तक शशि थरूर की बात है तो वह एक लोकसेवक थे और अपने अविवेक की कीमत भी वह अदा कर चुके हैं। केरल राज्य की कोच्ची टीम के हितों, सुनंदा पुश्कर की 70 करोड़ की स्वेट इक्विटी, और उनके अधीनस्थ का समझौते में शामिल होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन क्या यही पूरी कहानी है? और क्या शक्तिशाली अदानी ग्रुप और वीडियोकान के बारे में भी जानकारी जुटाई गई है। शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले के अपने हितों के अनुकूल बयानों से क्या किसी को हैरानी हुई? मैं आश्चर्यचकित हूं कि प्रवर्तन निदेशालय, इनकम टैक्स और खुफिया विभाग इन बातों पर विश्वास करते हैं। शशि थरूर अपने निजी हितों की वजह से पूर्वाग्रहित हुए, जिसे मीडिया ने बताने और दिखाने में पूरी रुचि ली। लेकिन क्या उनके मामलों को भी सामने लाया जाएगा, जिनकी वजह से उन्हें सरकार से जाना पड़ा। इस मामले के सभी तथ्य शायद सामने न आ पाएं, लेकिन यह एक सच्चाई है कि आईपीएल नीलामी में सब कुछ साफ-सुथरा तो नहीं ही है। सवाल है कि अदानी और वीडियोकोन के नीलामी के पूरे कागजात कहां हैं। क्या इसमें कुछ और स्वेट इक्विटी के मामले अंतर्निहित हैं?

 

आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी निश्चित ही आईपीएल फ्रैंचाइजी की सफलता के वास्तुशिल्पी हैं। लेकिन उनकी आंखों में इस समय तूफान है और बीसीसीआई से जुड़े लोग उनकी जल्द विदाई होते देखना चाहते हैं। शायद इससे उन्हें कुछ राहत भी मिले। इस समय मैच से ज्यादा इस मामले में लोगों की दिलचस्पी है। खासकर उनकी जिन्होंने ललित मोदी और आईपीएल से जुड़कर लाभ हासिल किया है। आईपीएल के कारनामों के लिए बीसीसीआई जिम्मेदार है। आईपीएल तो रजिस्टर्ड संस्था भी नहीं है। पिछले तीन वर्षो में हुए घोटालों और गलतियों के लिए केवल ललित मोदी को दोष देना एक गंभीर गलती होगी। बीसीसीआई पर यदि आक्रमण किया जाए तो कुछ और घोटालों का खुलासा हो सकता है। कुछ फ्रेंचाइजी की जांच के बजाय पूरे मामले पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में हम कुछ और कारनामों का खुलासा मीडिया में देख पाएंगे, जिसमें महत्वपूर्ण लोगों की वास्तविक संपत्ति का पता चलेगा। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में इन लोगों के एकाउंट्स आदि की सही जानकारी आने पर स्थिति की गहनता का पता चलेगा। हम सभी इस बात को जानते हैं कि दुबई में कुछ लोगों ने अपने पैसों को लेकर विशेष समझौते कर रखे हैं।

 

हमें अनेक मोर्चो पर गंभीर आंतरिक सुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। टैक्स की बचत करने वाले एकाउंट्स के बारे में सरकार को दुनिया के अलग-अलग देशों में पूरी छानबीन करनी चाहिए। इसके लिए दूसरे देशों से सहयोग लिया जा सकता है। आईपीएल में इन लोगों की वजह से छोटे निवेशकों को भी कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद करनी चाहिए कि यूपीए सरकार उन्हें कम से कम परेशान होने देगी, जो सीधे तौर पर इन मामलों में शामिल नहीं हैं। निश्चित रूप से उन्हें इन मामलों में न तो अभी और न ही बाद में परेशान किया जाना चाहिए। इस समय हम एक बड़े संकट से गुजर रहे हैं। यह संकट भविष्य में एक सकारात्मक बदलाव का कारण बन सकता है।

 

आज थोड़े से लोगों द्वारा पूरी राजनीतिक व्यवस्था को अपने हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस समय जरूरत है उच्चस्तरीय एकता की। किसी भी हाल में व्यवस्था को प्रभावित करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। ठीक इसी समय ऐसी व्यवस्था को भंग करने की भी जरूरत है, जो पिछले दशक से चमत्कार के माध्यम से अपने बिजनेस हितों को पूरा करती रही हैं। यूपीए सरकार इस तरह के काम के लिए संकल्पबद्ध है। प्रवर्तन निदेशालय व आयकर विभाग यदि एक बार शक्तिशाली राजनीतिक हितों को दूर झटक दें तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी और विश्वास करिए यह होने जा रहा है। उथलपुथल के इस दौर में हम चंद आपराधिक तत्वों को पूरे देश को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दे सकते।

 

आईपीएल प्रतियोगिता भले ही ध्यान भटका दे, लेकिन जीवन की सच्चाई बहुत अलग होती है। हमें महाशक्ति का दर्जा हासिल करने के लिए इस तरह की कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा। वर्तमान में हमारी राजनीतिक प्रासंगिकता और राजसत्ता को बेहिसाब आर्थिक लाभ हासिल करने की इच्छा रखने वालों की तरफ से चुनौती दी जा रही है। वे अपने व्यक्तिगत हितों को हासिल करने के लिए व्यवस्था को अव्यवस्थित करने का काम कर रहे हैं। हमें हर दिन कोई अनोखी बात सुनने को मिलती है। जरूरत हमें आगे बढ़ने की है। मेरा विचार है कि इस मामले में सीबीआई को शामिल किया जाना चाहिए। बीसीसीआई भी वर्तमान रुख पर आगे नहीं बढ़ सकती। उसे अपनी दिशा बदलनी होगी। आज हमारी आबादी एक अरब से भी ज्यादा है और हम अपनी जनता को नहीं भूल सकते। अतीत में उलझे रहने की बजाय हमें एक नई टीम और एक नई दिशा की जरूरत है।

Source: Jagran Yahoo

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

डा. एस शंकर सिंह के द्वारा
April 25, 2010

हमारे देश में भ्रष्टाचार बहुत पुरानी और बड़ी बीमारी है. अब यह कैंसर का रूप धारण कर चुकी है. उम्र में वरिष्ठ होने के कारण मुझे कुछ पुराने भ्रष्टाचार के मामले याद आते हैं. जब मैं छोटा था स्कूल में पढ़ता था तब नेहरु जी प्रधानमंत्री होते थे. उन दिनों टी प्रकासम, कृष्ण मेनन का जीप स्कैंडल, टी टी कृष्णामचारी का मूंधड़ा काण्ड, रवि शंकर शुक्ल, प्रताप सिंह कैरों, बख्शी गुलाम मोहम्मद, केशव देव मालवीय का सिराजुद्दीन काण्ड इत्यादि अनगिनत काण्ड चर्चा में रहते थे. आधुनिक समय में बोफोर्स, हर्षद मेहता काण्ड और अब आई पी एल अब लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. तब से अब तक क्या स्थिति में कोई परिवर्तन आया. लेशमात्र भी नहीं. इसको रोकने का कभी कोई प्रयत्न भी नहीं हुआ क्योंकि हमारी राजनीतिक व्यवस्था इस भ्रष्टाचार से पोषण ग्रहण करती है. बल्कि बीमारी द्रौपदी की साड़ी की तरह और बढ़ती ही गई है. मर्ज़ बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की. आचार्य विनोबा भावे जी को कहना पड़ा था की ” भष्टाचार शिष्टाचार बन गया है “. इसको रोकने के लिए एक मेजर सर्जरी की आवश्यकता है. मेरे विचार से भ्रष्ट तरीकों से कमाया हुआ धन और संपत्ति जिसका हिसाब किताब न दिया जा सके, ज़ब्त कर लेना चाहिए और भ्रष्टाचारियों के लिए क़ानून में आजन्म कारावास का प्रावधान होना चाहिए.

rachna varma के द्वारा
April 24, 2010

यह तो सच है कि इस तरह की खबरे अब हमे चौकाती नही है । लेकिन बहुत हो चुका अब इस सडे. हुये system को बदला जाये ।


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