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शिक्षा का अधिकार कानून -बना सकेगा ज्ञानवान समाज?

Posted On: 31 Mar, 2010 Others में

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शिक्षा को देश के 6-14 आयुवर्ग के बच्चों का मौलिक अधिकार बनाने वाला ऐतिहासिक कानून एक अप्रैल से लागू हो रहा है. इस कानून से लगभग एक करोड़ ऐसे बच्चों को लाभ होगा जो अभी भी स्कूल नहीं जाते हैं.

 

यह कानून छह से चौदह आयु वर्ग के सभी बच्चों को स्कूल पहुंचाने के कार्य को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय और राज्य सरकारों पर बाध्यकारी होगा जिससे स्कूल में बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके बच्चे या कभी किसी शैक्षणिक संस्थान तक नहीं पहुंचे बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 55:45 के अनुपात में कोष की साझेदारी पर सहमत होने के बाद इसे लागू किया जा रहा है.

 

यह कानून स्कूलों में शिक्षक और छात्रों के अनुपात को सुधारने का प्रावधान करता है. अभी कई स्कूलों में सौ-सौ बच्चों पर एक ही शिक्षक हैं. लेकिन इस कानून में प्रावधान है कि एक शिक्षक पर 40 से अधिक छात्र नहीं होंगे.

 

इस कानून की कुछ अच्छाइयां हैं जो शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने में मददगार सिद्ध होंगी. जैसे राज्य सरकारों को बच्चों के लिए लाइब्रेरी, क्लासरूम, स्पोर्ट्स ग्राउंड और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराना होगा. पंद्रह लाख नए शिक्षकों की भर्ती करनी होगी और उन्हें एक अक्टूबर तक प्रशिक्षित करना अनिवार्य है. सत्र के दौरान कभी भी प्रवेश लिया जाएगा तथा निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत स्थान निर्धन बालक-बालिकाओं के लिए रखना होगा.

 

लेकिन इस कानून में कुछ ऐसी कमियां भी हैं जिन्हें लेकर संदेह के बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं.  यह कानून 0-6 आयुवर्ग के बीच के बच्चों की शिक्षा के बारे में मौन है. जबकि संविधान के अनुछेच्द 45 में उल्लिखित है कि संविधान के लागू होने के दस वर्षों के भीतर सरकार 0-14 वर्ग के आयुवर्ग के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करेगी. कोठारी आयोग ने अपनी  अनुशंसा में शिक्षक-छात्र अनुपात को 1:30 रखने की सिफारिश की थी जबकि इस कानून में यह अनुपात 1: 40 का है. इस कानून में 14-18 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा के विषय में भी प्रावधान होने चाहिए थे, जबकि इसमें उसका नाम तक नहीं लिया गया है.

 

वर्ष 2002 में हुए 86वें संविधान संशोधन द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल कर लिया गया था साथ ही इसको मूल कर्तव्य भी बना दिया गया था. लेकिन सरकार में संकल्प शक्ति के अभाव के कारण इसे अभी तक पूरा नहीं किया गया. अब केन्द्र सरकार इसे कानून का रूप देकर वाहवाही लूटना चाहती है.

 

इतनी कवायद के बाद यह आशा तो की जा रही है कि भारत सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य को पूरा करने की हालत में पहुंच सकता है किंतु विभिन्न सरकारी योजनाओं और कानूनों की हालत देख कर एकदम से यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल रहेगा. यदि वाकई कथित लक्ष्यों को पाना है तो फिर सरकारी लालफीताशाही-नौकरशाही के अड़ंगा लगाने वाले रवैये पर लगाम लगा कर आगे बढ़ने की कोशिश करनी होगी. इसके अलावा शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाना होगा ताकि एक प्रोत्साहन वाला वातावरण कायम हो.

 

वास्तविक शिक्षा ज्ञानवान समाज को निर्मित करती है. इसके द्वारा जीवन जीने की सही कला का ज्ञान होने के साथ समाज और समुदाय के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध होता है. सही अर्थों में कहा जाए तो इसकी सबसे बड़ी भूमिका व्यक्तित्व के निर्माण में है जिससे मानव अपने भावी पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय मार्ग को प्रशस्त करता है. इसलिए केवल साक्षरता को लक्ष्य ना बनाया जाए बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और उसे जीवन में प्रायोगिक ढंग से उतारने की ओर ध्यान कायम करना चाहिए ताकि सभी वंचित वर्गों व समुदायों को इसका वास्तविक लाभ हासिल हो सके और अंतिम तौर पर परिणाम सुखद हो.

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

om prakash shukla के द्वारा
April 3, 2010

ambedker ke mahati prayaso seanuikched 45 me 1-14 sal ke bacho ko muft shilcha deneanuckched 45ke rajya ke neet nirdesho ke khand 4 me rakha gaya.guar करने wali bat ye ki khand char me matra Anukched hai jisake liye samay seema nirdharit hai samvadhan lagu hone ke 10 sal ke bhitar ho jana chaiye thadusara 14 sal ke umra ke bachu me 1-6 sal ke bache bhi shamil the jinake shikcha swasth poshad ki jimmedari rajyo ko karani thi.tatitanahi nahi 8sal muft gudvacta yuct shikcha ka pravidhan samvidhan me kiyya gaya tha aur iseanukched 46 ke sath padha jana tha jisame dalito,pichade aur adivasio ka vishesh khyaj rakhana tha IS pure shikcha ke bahas me naya mod uchchatam nyayala ne 1993 me unnikrishdan mamle me vyavstha di kianuched 45 ko khand3 ke jiwan ke haq wale ached 21 ke sath padha jana chahiye kyo ki gyan dene wali shikcha ke bagar insan ka jiwan nirrathak hai. Is prakar badi adalat ne 1se 14 sal ke bacho ko aniwarya aur muft shikcha pane ka muolic adhikar ka darja de diya. tabhi se bharat sarkar unnikrishadan fasale ko kamjor ya vikrit करने ka daw-pech chalta raha san 2002 me loksabha me 86 va sanshodhan vadheyak pesh huya natija yah hua ki jo adhikar sarvach nyayalay se mile the unaka bhi apharad kar liya gaya.is sashodhan ke jariye khand3 me 21 k joda gaya jisake madhyam se sirf 6-14 sal ke bacho ko aniwarya shikcha ka muolik adhikar sasa\\hart diya gaya pure khand 3 me yah akela muolik adhiksar hai jo sharto ke sath diya gaya hai.shart yah hai ki is prakar hum dekhte haiki jo adhikar sarvacha nyayalay ne 1993 me diya tha use is sarkar ne adhe adhyre man se muolik adhikaro me shamil kiya hai aur iske liye kisi ki gudgan करने kijarurat nahi balki inaka pardafas hona chahiye.

    विनीत तोमर. के द्वारा
    April 3, 2010

    ओम्पकाश जी, आप अपने पी.सी.परर पिटारा डाउनलोड करले तो आपको हिन्दी में लिखने में आसानी हो जायेगी आप सीधी इसी पैर लिख सकेगे.यह फ्री हे.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
April 2, 2010

अभिवादन, आधा पानी से भरा हुआ गिलास है. सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों ही दृष्टिकोद वाले लोग इसे देख सकते है. केंद्र ने अपनी झोली में एक और लड्डू डाल लिया है. ०-६ और १४-१८ वर्ष के बच्चों के लिए खुला आसमान है. अपने दम पर कुछ करेंगे. पूंजीपतियों द्वारा चलाये जा रहे निजी स्कूल तो लाखो को करोड़ों में तब्दील करने वाली मशीन है. ऐसे में २५ प्रतिशत गरीब बच्चे वहां कैसे अपना मुंह दिखायेंगे ? क्या कोई निजी स्कूल समाज सेवा के नाम पर भी चल रहा है ? कोई बच्चा महीने-दो महीने की फीस किसी कारन नहीं दे पाता है तो इसके लिए कुछ निजी स्कूलों ने अड्मिसन के समय ही सिकुरिटी राशी लेने की परंपरा चला दी है, जो ३-४ महीने की फीस की पूर्ती कर सकता है. नए-२ कानून बनाने से ज्यादा पहले से बने कानूनों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की अधिक जरुरत है. खैर कानून बनाने वाले कानून ही बनायेंगे. उसे लागू करने वाले उनके गुलाम थोड़े ही है. वो देखेंगे की कहाँ कितना लागू करना है, है भी या नहीं. वैसे भी दुनिया उम्मीद पर ही तो कायम है. धन्यवाद.

subhash के द्वारा
April 1, 2010

thank you for all this good information this stepwould be taken long time ago how disgracefull it that a big part of our population is still illiterate next step should be about uncontrol population and two children theory should accept irrespect of religion or cast

    anuradha chaudhary के द्वारा
    April 2, 2010

    सुभाष जी आपने मेरे मन की बात छीन ली जब तक जनसंख्या पर नियत्रण नही होगा कोई कानून कोई अधिनियम समाज के सभी लोगों को शिक्षित नही कर सकेगा। इसके लिये अभियान चलाने की जरूरत है। आप हमारे साथ जुडें। अनुराधा चौधरी यू0पी0 उदय मिशन से हमारा ब्लाग है जागरण जंक्शअन पर यू0पी0 उदय मिशन

vinod के द्वारा
April 1, 2010

इस नई शिक्षा प्रणाली का देश की जनता को बहुत फायदा होने वाला है. आज जिस तरह प्रधानमंत्री ने पहली बार किसी विधेयक के लिए देश को संबोधित किया वह वाकई ऐतिहासिक था. मगर अब देखना यह है कि यह कानून किस तरह देश एमं कार्य कर पाता है. हालांकि हम सभी इस नए कानून से बहुत खुश है.

manoj के द्वारा
March 31, 2010

शायद हो सकता है इस से हमारे देश की शिक्षा प्रणाली ठीक हो सकें.

    raju si के द्वारा
    April 4, 2010

    yojana manrega ki tarah loot-paat tak simit rahegi


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