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क्षुद्र राजनीति का लज्जास्पद स्वरूप –अमिताभ विरोध

Posted On: 31 Mar, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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कांग्रेस ने अमिताभ जैसे व्यक्तित्व का निरर्थक विरोध जिस आधार पर करना आरंभ किया है उसे देखकर सभी को आश्चर्य हो रहा है. मुद्दा सिर्फ इतना है कि अमिताभ गुजरात के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं. अभी हाल ही में महाराष्ट्र में हुए एक सरकारी कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के बाद से कांग्रेस जनों ने जो शर्मनाक प्रतिक्रिया देनी आरंभ कर दी है उससे उनके संकीर्ण मानसिकता का ही पता चलता है. राजीव सचान ने इस आलेख में इसी सच्चाई से रूबरू कराने का प्रशंसनीय प्रयास किया है.

 

यह लज्जास्पद ही नहीं, बल्कि घृणास्पद भी है कि देश का नेतृत्व कर रही कांग्रेस देश-दुनिया की समस्याओं से जूझने की बजाय यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि हिंदी फिल्मों के अप्रतिम अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके परिवार को कैसे अपमानित और लांछित किया जाए? यदि कांग्रेस महज एक राजनीतिक दल के रूप में ऐसा क्षुद्र आचरण कर रही होती तो उसका किन्हीं तर्को-कुतर्को के साथ बचाव किया जा सकता था, लेकिन आखिर कांग्रेस शासित केंद्र एवं राज्य सरकारें किसी भारतीय नागरिक को अवांछित कैसे घोषित कर सकती हैं और वह भी तब जब उस नागरिक का नाम अमिताभ बच्चन हो? कांग्रेस को अमिताभ से असहमत होने और यहां तक कि उनका विरोध करने का अधिकार है, लेकिन उसके मंत्री और मुख्यमंत्री उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार कैसे कर सकते हैं? क्या अमिताभ बच्चन देशद्रोही हैं?

 

यह संभव है कि कांग्रेस की ओर से जो राजनीतिक तुच्छता दिखाई जा रही है उससे अमिताभ बच्चन की सेहत पर फर्क न पड़े, लेकिन यह तथ्य आम भारतीयों को ग्लानि से भर देने वाला है कि विनम्र-विद्वान छवि वाले मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए आम कांग्रेसी नहीं, बल्कि उसके मंत्री-मुख्यमंत्री देश के सबसे लोकप्रिय अभिनेता की बेइज्जती कर रहे हैं? कांग्रेस अपने ऐसे आचरण के जरिये एक तरह से यह कहने में लगी हुई है कि आओ, हमसे सीखो कि अमिताभ बच्चन जैसे शख्स को कैसे बेइज्जत किया जा सकता है?

 

यह सही है कि अमिताभ बच्चन गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर बन गए हैं, लेकिन क्या यह कोई गुनाह है? क्या गुजरात देश के बाहर का कोई ऐसा हिस्सा है जहां से भारत विरोधी गतिविधियां चलाई जा रही हैं? हालांकि अमिताभ बच्चन यह स्पष्टीकरण दे चुके हैं कि वह गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर हैं, नरेंद्र मोदी के नहीं, फिर भी अनेक लोगों को उनका फैसला रास नहीं आया है और वे उनकी आलोचना कर रहे हैं.

 

इस आलोचना में कोई बुराई नहीं, बुराई इसमें है कि महाराष्ट्र, दिल्ली की सरकारों के साथ-साथ केंद्रीय सत्ता के प्रतिनिधि अमिताभ बच्चन को अवांछित बताने का काम कर रहे हैं.चूंकि अशोक चव्हाण के साथ-साथ कांग्रेस के एक प्रवक्ता साफ तौर पर कह चुके हैं कि सरकारी कार्यक्रमों मं बच्चन की मौजूदगी मंजूर नहीं है इसलिए इस नतीजे पर पहुंचने के अलावा और कोई उपाय नहीं कि बिग बी को अपमानित करने का फैसला कांग्रेसी सरकारों का नीतिगत निर्णय है.आखिर ऐसा भी नहीं है कि गुजरात का ब्रांड एम्बेसडर बनना कोई गैर कानूनी कृत्य हो.अभी यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में उसी तरह का काम करेंगे जैसा उन्होंने मुलायम सिंह के शासन में उत्तर प्रदेश का ब्रांड एम्बेसडर बनकर किया था.तब वह कहा करते थे कि यूपी में दम है…हो सकता है कि वह गुजरात के बारे में भी ऐसा ही कुछ रहें या फिर केवल इस राज्य की प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासत का गुणगान करें.संभव है कि लोगों को उनकी ओर से गुजरात की तारीफ में जो कुछ कहा जाए वह पसंद न आए, लेकिन क्या इसके आधार पर उनके किसी राज्य के ब्रांड एम्बेसडर बनने के अधिकार पर कुठाराघात किया जा सकता है?

 

दिल्ली में आयोजित अर्थ ऑवर शो प्रतीकात्मक ही सही, एक बड़े उद्देश्य के लिए था.कांग्रेसजनों को इस शो के ब्रांड एम्बेसडर अभिषेक बच्चन के पोस्टर हटाने अथवा हटवाने के पहले इस पर लाज क्यों नहीं आई कि कम से कम ग्लोबल वार्मिग के प्रति आम जनता को जागरूक बनाने के इस कार्यक्रम में संकीर्णता दिखाने से बचा जाए? अर्थ ऑवर शो में हुए अनर्थ पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की इस सफाई पर आश्चर्य नहीं कि उन्हें नहीं पता कि अभिषेक इस कार्यक्रम के ब्रांड एम्बेसडर हैं.चूंकि बच्चन परिवार की बेइज्जती का कांग्रेसी कार्यक्रम शासनादेश जारी कर नहीं चलाया जा रहा इसलिए शीला दीक्षित को झूठ का सहारा लेना पड़ा.

 

इसके पहले अमिताभ के भय से जयराम रमेश बाघ बचाओ अभियान के कार्यक्रम से गायब रहे.इसी तरह अशोक चह्वाण को पुणे में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में एक दिन पहले हाजिरी बजानी पड़ी.इस पर गौर करें कि कांग्रेसजन कैसे कार्यक्रमों में अपनी ओछी राजनीति का परिचय दे रहे हैं-अर्थ ऑवर शो में, बाघ बचाओ अभियान में और मराठी साहित्य सम्मेलन में.कम से कम ऐसे कार्यक्रमों को तो घटिया राजनीति से दूर रखा ही जा सकता था.बीते दिनों कांग्रेस के आग्रह के बावजूद मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने गांधी नगर में उस समारोह में शिरकत की जिसमें नरेंद्र मोदी भी थे.क्या अब कांग्रेस उनका भी अमिताभ बच्चन की तरह विरोध करेगी?

 

बेहतर होगा कि कांग्रेस बच्चन परिवार को कानूनी रूप से अवांछित घोषित करा दे.तब कम से कम कांग्रेसी नेता अमिताभ-अभिषेक से कन्नी काटने के लिए झूठ का सहारा लेने से तो बच जाएंगे.माना कि कांग्रेस को नरेंद्र मोदी से चिढ़ है और वह उनके साथ खड़े होने वालों को भी बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं, लेकिन क्या इस तथ्य को झुठला दिया जाए कि वह भारत के एक प्रांत के मुख्यमंत्री भी हैं और उन्हें ठीक उसी तरह लोगों ने चुना है जैसे शीला दीक्षित और अशोक चह्वाण को? क्या अब कांग्रेस अमिताभ बच्चन की तरह रतन टाटा, मुकेश अंबानी आदि को भी अवांछित करार देगी, क्योंकि ये दोनों न केवल गुजरात में भारी निवेश कर रहे हैं, बल्कि मोदी की तारीफ भी कर रहे हैं? क्या मुख्यमंत्रियों के अगले सम्मेलन में कांग्रेसी राज्यों के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को घुसने से रोकेंगे या फिर उनके आते ही सम्मेलन छोड़कर चले जाएंगे?

Source: Jagran Yahoo

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

om prakash shukla के द्वारा
April 3, 2010

Sonia congress to sas bahu ko mat dene wali gharelu rajneet kar rahi hai.aur chapluso ke fuoj se tali bajawa ker anndit ho rahi hai.Sonia Rahul ki rajneet dekh ker to lagata haiki ye log desh ko kaise chala rahe hai.suotiha dah ki mari sonia bechjari isake siwai Amitabh bachan ka kuch ker bhi to nahi sakati.ye sadi ke mahanayak apne bute bane hai,aj jo puri dunia me unaka danka baj raha hai wahi unaki ahmiyat sabit karne ke liye kafi hai.dusari taraf bechari sonia jo gandhi khandan ki vadhawa ki hasiyat se cngress ki sadar bani baithi hai.Inhe rajneet ke bare me kuch nahi malum lekin sas,bahu ,dewarani jethani ki rajneet ki champian lagati hai akhi Menaka Gandhi ko kab ka nibta hi chuki hai.Hamare yaha ek deshi kahawa kahi jati haijo sonia gandhi kemuojuda kriyakalapo per ekdum sateek bathati hai,Jab maug adami mardata hai to pahale apne syaji ko hi lalkaratahai.Hamne to yah bhi suna hai ki shadi ke pahle sonia Amitabh ke ghar hi rahi thi aur Jaia bachan ne unhe sadi pahanana aur hindustani reet riwaj seekha tha.congressi to haihi aise ki unhe bathane ke liye kaha jata hai to we let jate hai.nahi to Thakreki alochanakis muh se karte hai jab khudunase neechtame bahut age dikhtr\\e hai Thakre ka to ek stand tha inaka to wah bhi nahi.Modi ke sath hindustan ke uchchatam nyayalay ke mukhya nyayadhish ko bathane me koi apatti nahi aur in emerjency laga ker desh ko karagar me badalne walo aur dilli me hajaro sikho ko muot ke dhat utarne walo ko koi natik adhikar nahi ki sadi ke mahanayak jise hindustan ki janta ne salo se ser,ankho per bitha rakhahai ke bare me ochi harkat kare ye to pata nahi ki alakaman se unhe uphar milata hai ya nahi lrkin janta unaka swagat juto se karane ki sochne lagi hai.In congesio ka kya jab ala kaman ko lagega ki ulti pad gayi to kutte ki tarah dutkare jayege aur fir khamosh ho jayege.inaki yahi harkat Rahu ko pradhan mantri ke liye sabse yigya batane per Arjun singh vagarah ke sath hua.

Dr S Shankar Singh के द्वारा
April 1, 2010

बच्चन परिवार और सोनिया गाँधी परिवार के बीच तल्खी बोफोर्स के दिनों में ही पैदा हुयी थी जो आज तक कायम है. दोनों पक्षों में कोई भी इस बारे में कुछ कहने को तैयार नहीं है. तभी से कभी अमिताभ बच्चन को कभी जया बच्चन को प्रताड़ित करने के बहाने ढूंढें जाते हैं. गुजरात का ब्रैंड एम्बेसेडर बनना तो केवल एक बहाना मात्र है.इसकी जड़ें काफी पीछे तक जाती हैं.

skjain के द्वारा
April 1, 2010

एक ही उल्लू काफी है बर्बादे गुलिस्तान करके को, हर शाख पर उल्लू बैठे है अंजामे गुलिस्तान क्या होगा.

Naveen Pandey के द्वारा
March 31, 2010

समझ में नहीं आता की देश की राजनीति किधर जा रही है

lavlesh kumar mishra के द्वारा
March 31, 2010

यह निहायत ही घटिया कार्य है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए, कमतर ही होगी। कांग्रेस बजाय कोई प्रशंसनीय कार्य करने से रही। अलबत्‍ता, मुख्‍यमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को हर समय कोसने से नहीं बाज आ रही है। मोदी जी तो ऐसे व्‍यक्ति हैं जिनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम ही होगी। उनकी अगुवाई में गुजरात उ‍तरोत्‍तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। कांग्रेस महज इसीलिए नाराज है क्‍योंकि वे भाजपा पार्टी से जुडे हुए हैं। मेरा संदेश है उन कांग्रेसी मंत्रियों व नेताओं को, जो नाहक ही निंदा पर उतारु हैं। उन्‍हें व्‍यक्ति से घृणा के बजाय अच्‍छे कार्य की तारीफ करनी चाहिए। आखिर उन्‍होंने देश व प्रदेश की नीतियां बनाने का जिम्‍मा जो लिया है। लवलेश कुमार मिश्र, रायबरेली।


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