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लाल गलियारे का बढ़ता दायरा

Posted On: 10 Mar, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नक्सल आंदोलन के रूप में देश एक ऐसे खतरे का सामना कर रहा है जिस पर यदि तुरंत लगाम नहीं लगाया गया तो फिर एक साथ कई समस्याएं सर उठा कर खड़ी हो जाएंगी. केंद्रीय गृह सचिव ने पिछले दिनों कहा था कि नक्सली समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं और सेना के कुछ रिटायर अफसरों की मदद से उनका लक्ष्य 2050 तक भारत सरकार का तख्ता पलट कर अपनी सत्ता स्थापित करना है. लेकिन इस गंभीर रहस्योद्धघाटन की जैसी प्रतिक्रिया अपेक्षित थी वह नहीं हुई.

 

आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा होने के बावजूद नक्सलियों से निपटने के लिए साझी रणनीति पर अमल नहीं हो पा रहा है. आठ राज्यों के 34 जिले नक्सलियों की गिरफ्त में आ चुके हैं . 40,000 वर्ग किमी इलाके पर कब्जा कर 1400 करोड़ रुपये सालाना की वसूली करने वाले नक्सलियों की देश के खनिज संसाधनों पर बढ़ती पकड़ आर्थिक विकास की गाड़ी को पटरी से उतार सकती है. निरंतर गंभीर होती परिस्थितियों में नक्सलियों के अधिक ताकतवर होने का इंतजार नहीं किया जा सकता. लेकिन नक्सलियों से दो-दो हाथ करने के साथ-साथ उन कारणों को भी दूर करना होगा जिनके कारण नक्सली हिंसा तेजी से पाव फैला रही है.

 

स्वतंत्रता के बाद पूंजी व तकनीक प्रधान विकास रणनीति अपनाने के कारण देश भर में विकेंद्रित परंपरागत लघु व कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ. आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़ी परियोजनाएं लगीं, लेकिन स्थानीय समुदायों को उनका लाभ नहीं मिला. यहां दामोदर वैली कार्पोरेशन का उल्लेख प्रासंगिक होगा.

 

1948 में दामोदर व उनकी सहायक नदियों पर शुरू हुई इस परियोजना को पूरा हुए आधी शताब्दी से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इससे विस्थापित हुए लोग आज भी मुआवजे के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि इस परियोजना से पैदा हुई बिजली का लाभ लेकर हजारों लोग करोड़पति हो चुके हैं. खनिज संसाधनों से संपन्न किंतु आर्थिक रूप से पिछड़े नक्सली क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा सस्ता श्रम मुहैया कराते हैं. यहा एक ओर बेशकीमती खनिज निकालने के लिए अरबों डालर झोंके जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आदिवासियों को उनके घरों व जंगलों से उजाड़ा जा रहा है. इन क्षेत्रों में राज्य सरकारों और कॉरपोरेट घरानों का ऐसा गठजोड़ उभर चुका है जो सस्ते श्रम और सस्ते संसाधनों को किसी भी कीमत पर अपने कब्जे में करने की होड़ में लगा है. इससे स्थानीय समुदायों की जीविका खतरे में पड़ रही है.

 

देश की ज्यादातर गरीब जनसंख्या पिछड़े क्षेत्रों में रहती है. अत: समेकित विकास के लिए इन क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाना होगा. इन क्षेत्रों में ढाचागत सुविधाएं और संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा. इससे न केवल बाजार से जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि संस्थागत बाधाओं को भी दूर किया जा सकेगा. सबसे बढ़कर राजनीतिक भ्रष्टाचार दूर करने के गंभीर उपाय करने होंगे. राजनीतिक भ्रष्टाचार और एकागी विकास रणनीति का परिणाम अमीरी-गरीबी की बढ़ती खाई के रूप में सामने आ रहा है . 2008 में ‘जर्नल ऑफ कंटम्प्रेरी’ एशिया में छपे एक लेख के अनुसार दुनिया की सबसे बड़ी गैर बराबरी भारत में पाई जाती है, जहां पैंतीस खरबपति परिवारों की दौलत इस देश के अस्सी करोड़ भूमिहीन किसानों, मजदूरों और शहरी गंदी बस्तियों के लोगों की कुल दौलत से अधिक है.

 

नक्सलवाद को काबू करने के क्रम में ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी के फासले को मिटाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चुनौती भारी है और एकांगी दृष्टिकोण की बजाय एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाकर ही समस्या को काबू में किया जा सकता है.
Source: Jagran Yahoo

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

om prakash shukla के द्वारा
April 14, 2010

bahut badhia vishleshad kiya hai apne badhai ho.isaki ek prati Chidumbrum ji ko jarur bhejiega shayed unhe budhi a jai aur we soche ki samashya ki jad kaha hai.jab aj se dasko pahale ke visthapito ko nyay nahi mila fir kis adhar per ye jaberjasti ho rahi hai.Ap carporate vakil ho sakate hai ya carooporate dalal dono ek sath nahi chalne wala.loktantra ka matalab jaberdasti nahi ho sakta .samajh nahi ata ki abhi pichale grih mantri shivraj oopatil kah rahe the ki vastav me naxsalvadi utana bada khatara nahi jitana badha ker bataya ja raha hai.fir ekaek kya ho gayaki antaric suracha ke liye we sabse bada khatara ban gaye.Chidmbrum ko videshi atankvadio se nipatane ke liye laya gaya tha aur we apna ajenda lagu karane lage.Vedanta ke bord of director ki kursi isi liye chod ker to samaj seva ka natak karane to nahi aye hai ki bagar prashikchad ke aur bagar radneet ke bagar rajyo se samanjasya bathae suracha balo ko merwane per utaru hai.itani jaldi bhi kya haiadivasio ka sab kuch to samvidhan dwara hi loot ker unhe apne jangal aur jamin se bedakhal ker diya gaya aur ab unhe mar ker jaberdasti bhagaya ja raha hai.aj kaha ja raha hai ki adivasio ke hitasi naxsalvadi nahi ho sakte lekin inhi adivasio ko tendu patte ki todai ki keemat 2paise bandal thekedaro se milta tha to ye tathakathit naxsalvadi hi the ki usi bandal ka ab 1rupia unhe mil raha hai.to sawal naxsalvadio ke samarthan ka nahi hai bali garibo ke shoshad ka hai jisame sabhi shamil hai sarkar bhi.isiliye aj jarurat hai garibo aur vanchito ke pach me khade hone ki jo is mahati jimedari se bhagega use bhavishya maf nahi karega.

Rakesh bhartiya के द्वारा
March 11, 2010

देश के नेतागण धन बटोरने से खाली होंगे तो नसलवाद तो हर समस्या को काबू में किया जा सकता है. राकेश भारतीय

manoj के द्वारा
March 10, 2010

वास्तव में नक्सलवाद आज भारत की सबसे बडी परेशानी बन कर सामने आ रहा हैं .जितना खतरा हमें आतकवादियों से है उतना ही इन नक्सलियों से भी हैं.


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